चेक बाउंस होने के एक मामले मे सफीदों के प्रथम श्रेणी ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत ने गांव छापर निवासी संदीप को एक साल की कैद व चेक बाउंस होने के कारण शिकायतकर्ता को हुई परेशानी के लिए चेक राशि के बराबर मुआवजे का भुगतान करने की सजा सुनाई है। अदालत ने यह भी कहा है कि शिकायतकर्ता किसी भी पक्ष द्वारा इस अदालत के फैसले के विरुद्ध दायर की गई अपील या रिवीजन यदि कोई है तो, उसके फैसले के बाद ही दोषी की तरफ देय राशि की वसूली कर सकेगा। इस मामले में शिकायतकर्ता ने संदीप की तरफ 17.88 लाख की देनदारी दिखाई थी। इसका कथित रूप से जारी चेक बैंक में लगाया तो वह बाउंस हो गया, जबकि संदीप का अदालत में कहना था कि शिकायतकर्ता ने उसके चेक का दुरुपयोग किया है। अदालत ने आदेश में टिप्पणी करते हुए कहा कि बचाव पक्ष यह सिद्ध नहीं कर पाया कि शिकायतकर्ता ने किस दुश्मनी के कारण उसके चेक का दुरुपयोग किया। अक्तूबर 2015 में उसने अदालत मे नेगोसिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत यह शिकायत दर्ज कराई थी।