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मजदूरों का समझा दर्द, मानवता का निभाया फर्ज

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कोरोना में लोगों को मास्क बांटते राजकुमार गोयल। फाइल फोटो। - फोटो : Jind
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जींद। अखिल भारतीय अग्रवाल समाज के प्रदेशाध्यक्ष राजकुमार गोयल कोरोना काल में किसी मसीहा से कम नहीं थे। अपने घर और परिजनों को भूलाकर हर समय वह प्रवासी मजदूरों की सेवा में रहते थे। कोरोना काल में जब लॉकडाउन लगा तो हर किसी को अपने परिजनों की चिंता सताने लगी। जिले में हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर थे, जिनको खाना खिलाने के साथ-साथ राजकुमार गोयल उनका दुख-दर्द भी साझा करते थे। जींद को छोड़ते समय इन मजदूरों ने राजकुमार गोयल व उनकी टीम को खुशी के आंसुओं से धन्यवाद किया। राजकुमार गोयल आज भी शहर की समस्याओं के समाधान को लेकर लगातार आवाज बुलंद करते हुए नजर आते हैं।
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वर्ष 2019 में अप्रैल महीने में ही लॉकडाउन लग गया था। इस कारण हर किसी को अपने परिवार की चिंता सताने लगी थी। जिले में हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर थे, जो अपने घर जाना चाहते थे लेकिन प्रशासन ने उन्हें सेल्टर हाउस बनाकर रोक दिया था। इन सेल्टर हाउसों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए राजकुमार गोयल मसीहा बनकर उभरे। सुबह व शाम के समय इन प्रवासी मजदूरों को खाना और फल राजकुमार गोयल व उनकी टीम पहुंचाती थी। प्रवासी मजदूरों का दुख-दर्द साझा करने के लिए राजकुमार गोयल मजदूरों के साथ बातचीत करते था उनको यह एहसास नहीं होने दिया कि वह अपने प्रदेश से बाहर हैं।
...जब एक बुजुर्ग फंसे थे सेल्टर हाउस में
उत्तरप्रदेश के एक बुजुर्ग एक सेल्टर हाउस में फंस गए थे। तीन दिन तक किसी ने उनकी बात नहीं सुनी तो राजकुमार गोयल बुजुर्ग से मिले। काफी प्रयासों के बाद गोयल ने बुजुर्ग को उनके घर पहुंचाया। इसी प्रकार एक केरला की लड़की भी ऐसे ही फंस गई थी। उसकी भाषा किसी को समझ नहीं आ रही थी। गोयल ने लड़की को उसके घर पहुंचाया।
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जनसमस्याएं उठाने में भी हर समय रहते हैं तैयार
राजकुमार गोयल समाजसेवा के साथ-साथ शहर की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाकर उनका हल करवाते थे। रोहतक रोड निर्माण में उनका बहुत बड़ा हाथ रहा है। गोयल ने जींद विकास नामक संगठन बनाया। इस संगठन के प्रधान के नाते इन्होंने बाल भवन रोड पर सड़क के बीच खड़े ट्रांसफार्मर को रास्ते से हटवाया। इसके लिए उनको सड़क के बीच धरना भी देना पड़ा।
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