रेवाड़ी। 23 मार्च केवल एक तिथि नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान की अमर गाथा है। इस दिन भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए और देशभक्ति की नई परिभाषा लिखी। ये कहना है शिक्षाविद मनोज कुमार वशिष्ठ का। उन्होंने बताया कि इन वीरों ने मृत्यु को नहीं, बल्कि अमरता को अपनाया। उनका बलिदान हमें सिखाता है कि राष्ट्र सर्वोपरि है और व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर देश के लिए जीना ही सच्चा कर्तव्य है। उनका इंकलाब जिंदाबाद का नारा आज भी युवाओं में ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करता है। बलिदानी दिवस पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम केवल आजाद भारत के नागरिक बनकर न रहें, बल्कि एक सशक्त, जागरूक और संस्कारित भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।