05जेएनडी23 : वह दरवाजा व चौखट जो कुरुक्षेत्र संग्रहालय को भेंट किया गया। संवाद
नरवाना। मोहलखेड़ा गांव में 160 साल पुरानी हवेली की चौखट व दरवाजे को पूर्वजों की विरासत के रूप में कुरुक्षेत्र के धरोहर संग्रहालय को भेंट स्वरूप समर्पित कर दिया। इस हवेली की चौखट लाल पत्थर से बनी थी।
डॉ. अमरजीत चहल ने बताया कि उनके परदादा चौधरी बीर सिंह एवं हरिचंद मोहलखेडा गांव में सन् 1860 में हवेली का निर्माण करवाया गया था। इस हवेली में लाल पत्थर से बनी चौखट व दरवाजे में चांदी और तांबे की मिक्स धातु से बने कोके लगे हुए थे, जो अपने आप में ही एक धरोहर है। 20 साल पहले गांव में कुरुक्षेत्र संग्रहालय की एक टीम आई थी, जिन्होंने इस पत्थर से बनी चौखट पर बनी कलाकृतियों को देखकर इसको अद्भुत मानते हुए संग्रहालय के लिए इसकी आवश्यकता जाहिर की थी। काफी लोगों ने चौखट व दरवाजे को खरीदने के लिए भी काफी पैसे लगाए थे, लेकिन परिवार ने इसको अपने पूर्वजों की विरासत व निशानी मानते हुए नहीं बेचा। डॉ. अमरजीत ने बताया कि परिवार ने पूर्वजों की विरासत व उनका नाम अमर रखने के लिए चौखट व दरवाजे को कुरुक्षेत्र के धरोहर संग्रहालय में भेंट स्वरूप समर्पित करने का निर्णय लिया गया। सोमवार को जब यह चौखट व दरवाजा कुरुक्षेत्र धरोहर के लिए भेंट किया गया तो संग्रहालय ने उनको प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान सत्यवान चहल रिटायर्ड इंस्पेक्टर, सुरेश चहल, डॉ. चावला भी मौजूद रहे।
05जेएनडी23 : वह दरवाजा व चौखट जो कुरुक्षेत्र संग्रहालय को भेंट किया गया। संवाद