अधिक रुपये के लालच में लोगों के सेहत से खिलवाड़ कर रहे मिलावटखोर, कार्रवाई के दौरान कई बार पकड़े जा चुके हैं
सतीश जागलान
जींद। जिले में मिलावटी देसी घी बनाने का काम वर्षों पुराना है। लगभग 15 साल पहले जींद में पहली बार सफीदों गेट पर एक दुकानदार के पास मिलावटी घी पकड़ा गया था। इसके बाद जींद में कई बार मिलावटी घी बरामद किया जा चुका है। इन आरोपियों के पास से नामी कंपनियों के रेपर भी बरामद हो चुके हैं, लेकिन लोग पकड़े जाने के बावजूद इस धंधे पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। यह लोग देसी घी के नाम पर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। देसी घी बनाने का तरीका आसान तथा मुनाफा ज्यादा होने के कारण लोग इस धंधे को छोड़ नहीं रहे हैं।
जुलाई 2015 में किशनपुरा गांव में नकली देसी घी बनाने के मामले का भंडाफोड़ हुआ था। पुलिस ने गांव में एक व्यक्ति के घर छापा मारकर यहां से दो क्विंटल 15 किलोग्राम मिलावटी घी पकड़ा था। आरोपी को भी पुलिस ने मौके से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने मौके से प्लास्टिक के खाली डिब्बे, सिलिंडर, तौल मशीन व अन्य कई सामान भी जब्त किया है। 18 जुलाई 2021 को सफीदों रोड स्थित लाठर मार्केट से भी मिलावटी देसी घी बरामद किया था। यहां से कार को पकड़ा था। कार में वीटा, मधुसूदन, नोवा, डायरी प्लस, पारखी घी के एक-एक किलो के पैकेट व काफी संख्या में खाली रेपर व टिन बरामद किए थे। नवंबर 2021 में रोहतक रोड पर रघु नगर से एक इंडस्ट्रीज में भी नकली देसी घी पकड़ा था। यहां दो साल से नकली घी बनाया जा रहा था। यहां वीटा व अन्य ब्रांडेड कंपनियों के रेपर और पैकिंग दिल्ली से तैयार करवाते थे। यहां से 12 अन्य कंपनियों के रेपर भी बरामद किए गए। तीन टेट्रा मशीनें, एक बेल्ट मशीन, लोहा डिब्बा सील करने वाली मशीन, पीपे को ढक्कन लगाने वाली मशीन, दो इलेक्ट्रिक कांटा, गर्म हवा के फव्वारे कब्जे में लिए हैं। यहां से भी एक हजार लीटर घी बरामद किया गया था। 2015 में भी एक साइकिल की दुकान में घी बनाते हुए कुछ लोगों को पकड़ा था। टीम ने यहां से साढ़े नौ क्विंटल घी बरामद किया था।
खाद्य एवं सुरक्षा विभाग के अनुसार मिलावटी देसी घी बनाने का तरीका बिल्कुल आसान है। देसी घी बनाने के दौरान रिफाइंड व वनस्पति घी को गर्म कर मिलाया जाता था। इसके बाद इसमें एसेंस (सुगंधित द्रव्य) डाला जाता था, जिससे इसमें देसी घी जैसी खुशबू आने लगती थी। जब यह ठंड हो जाता है तो इसमें कुछ और केमिकल मिलाए जाते थे, जिससे यह देसी घी जैसा ही दिखाई देता था। बाजार में इसको 400 से 500 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचा जाता है, जबकि इस कुल खर्च 150 रुपये प्रति लीटर के आसपास आता है।