जींद। चाइल्ड केयर लीव और विदेश जाने वाले शिक्षकों को अब एनओसी लेनी होगी। इसके लिए लिए मौलिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं।
इन मामलों में एक महीना पहले ही अनुमति से संबंधित पत्र भेजना होगा। उसके बाद मंजूरी दी जाएगी। इसमें स्कूल प्राचार्य को भी विद्यार्थियों की संख्या की जानकारी देनी होगी, ताकि समयावधि तक दूसरे अध्यापक की वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से चलाई जा सके। चाइल्ड केयर लीव से संबंधित मामलों में प्रार्थी के बच्चे की आयु की जांच करना अनिवार्य किया गया है। इसका कारण यह है कि कुछ जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों की ओर से प्रार्थी के बच्चे की आयु 18 वर्ष से ज्यादा होने के बाद भी सीसीएल से संबंधित मामले निदेशालय में भेजे जा रहे हैं। सीसीएल या विदेश जाने से संबंधित पूरे मामले को स्कूल प्राचार्य, खंड शिक्षा अधिकारी स्वयं प्रमाणित कर निदेशालय में भेजना होगा। भविष्य में सीसीएल व विदेश जाने से संबंधित मामले निर्धारित नियमों का पालन किए बिना निदेशालय में भेजे गए तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। महिला शिक्षकों को पूरी सर्विस के दौरान 730 दिन की चाइल्ड केयर लीव देने का प्रावधान है। इसमें 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखभाल के लिए महिला शिक्षक छुट्टी ले सकती है। इसमें एक समय में ज्यादा से ज्यादा लगभग ढाई महीने की छुट्टी महिला शिक्षकों को मिल जाती है। कई बार शिक्षक 18 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों की देखभाल के लिए भी सीसीएल व विदेश जाने के लिए भी छुट्टियां अप्लाई कर देते थे। अब इसके लिए शिक्षकों को संबंधित स्कूल के प्राचार्य व खंड शिक्षा अधिकारी एनओसी देंगे।
एक महीना पहले निदेशालय को करवाना होगा अवगत
चाइल्ड केयर लीव या फिर विदेश जाने से संबंधित मामले के बारे में मौलिक शिक्षा निदेशालय के पास कम से कम एक महीना पहले अवगत कराना होगा। छुट्टी पर जाने वाले शिक्षक की जगह दूसरे वैकल्पिक शिक्षक की व्यवस्था भी करनी होगी, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो। इसके बारे में निदेशालय से पत्र जारी हुआ है। -विजय लक्ष्मी जिला शिक्षा अधिकारी जींद।