फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jind News: गोमूत्र, गोबर, बेसन और गुड़ से जीवामृत बनाना सिखाया

Tue, 03 Sep 2024 01:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
विज्ञापन
02जेएनडी30 : प्र​शिक्षुओं को प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी देते डॉ. सुभाष चंद्र। संवाद
विज्ञापन
जींद। हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान (हमेटी) में कृषि सेवाओं में डिप्लोमा कर रहे प्रशिक्षणार्थियों ने सोमवार को गांव अहीरका के आर्गेनिक कृषि फार्म का हमेटी के फेसिलिटेटर डॉ. बीपी राणा के नेतृत्व में भ्रमण किया। यहां पर ट्रेनीज ने प्राकृतिक खेती, एकीकृत कीट प्रबंधन व समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन की अभ्यासात्मक जानकारी हासिल की।
विज्ञापन

प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र ने उन्हें कीट प्रबंधन के लिए प्रयोग किया जा रहे पीले व नीले चिपचिपे कार्ड व फेरोमोन ट्रैप्स दिखाएं। इसमें हजारों की संख्या में हानिकारक कीट फंसे व चिपके मिले। उन्होंने बताया कि यह सब कीट बिना जहरीला कीटनाशक प्रयोग करे नियंत्रित हो गए। इसी प्रकार समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन में गाय के गोमूत्र, गोबर, बेसन व गुड़ से जीवामृत बनाना सिखाया। ट्रेनीज ने जीवामृत व घंजीवामृत के परिणाम धान की फसल में देखे। इसमें किसी तत्व की कमी नहीं दिखाई दे रही थी। फसल हरी-भरी स्वस्थ खड़ी थी। प्रशिक्षणार्थियों ने फसल अवशेषों से मल्चिंग, आच्छादन के प्रयोग के फायदे भी देखे। मल्चिंग से मिट्टी में केंचुओं की बहुत बड़ी संख्या देखने को मिली। वे मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ा रहे हैं। महिला किसान सुमित्रा रानी ने मूल्य संवर्धन कर बनाए गए उत्पाद बासमती चावल, शहद, मूंग, हल्दी सरसों का तेल आदि भी ट्रेनीज को दिखाए।
उन्होंने कहा कि किसान को अतिरिक्त या ज्यादा भाव में कृषि उत्पाद बेचने का अवसर मिलता है। किसानों की आय में बढ़ोतरी होती है। प्रगतिशील किसान राजपाल सिंह श्योराण ने बताया कि वह सरसों का तेल निकाल कर और बाजरे के बिस्कुट बनाकर बेचते हैं, जिससे उन्हें ज्यादा मुनाफा होता है। किसान अपनी फसल को सीधे बेचने के बजाय उसके उत्पाद तैयार कर आमदनी बढ़ा सकते हैं।

02जेएनडी30 : प्रशिक्षुओं को प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी देते डॉ. सुभाष चंद्र। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें