जींद। सर्दी के मौसम में खांसी आम बात है। इसके अलावा बुखार तथा गला खराब की भी समस्या रहती है। ऐसे में लोग नागरिक अस्पताल में काफी उम्मीदों के साथ आते हैं लेकिन अस्पताल में जब दवाइयां लिखी जाती हैं तो वह नहीं मिल रही।
नागरिक अस्पताल में इस समय खांसी का सिरप, एलर्जी की क्रीम, सिट्राजिन जैसी महत्वपूर्ण दवाइयां ही नहीं हैं। ऐसे में लोगों को यह दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। नवंबर महीने में दूसरी बार है, जब अस्पताल में दवाइयां कम रह गई हैं। पांच नवंबर के आसपास भी अस्पताल में दवाइयों का स्टॉक खत्म हो गया था। इसका मुख्य कारण यह है कि अस्पताल को सरकार के वेयरहाउस से दवाइयां मिलती हैं, जो फिलहाल नहीं मिल रही हैं। अस्पताल प्रशासन ने दवाइयों की मांग भेजी हुई है।
नागरिक अस्पताल में इस समय जरूरत की दवाओं का टोटा हो गया है, जिसके चलते अस्पताल में आने वाले मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस समय पर्यावरण प्रदूषण व मौसम परिवर्तन के चलते दमे व खांसी के मरीज ज्यादा अस्पताल में पहुंच रहे हैं। यह लोग एसिडिटी व खांसी की ज्यादा तकलीफ बता रहे हैं। ऐसे में चिकित्सक द्वारा इन रोगों से संबंधित दवा तो लिखी जा रही है लेकिन यह दवाएं उन्हें दवा खिड़की पर नहीं मिल रही हैं, क्योंकि इन दवाओं का स्टॉक खत्म हो चुका है। इस कारण मरीजों को बाहर से महंगे रेटों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। इस समय में दवा में बेहद जरूरी कफ सिरप उपलब्ध नहीं है। इस समय मौसम में बदलाव के चलते सर्दी, खांसी और जुखाम के ज्यादा मरीज आ रहे हैं, जिन्हें खांसी के लिए कफ सिरप दिया जाना बेहद जरूरी है, लेकिन यह कफ सिरप अस्पताल में उपलब्ध ही नहीं है। इसके अलावा अस्पताल में तेजाब, एसिडिटी व गैस के भी काफी मरीज आते हैं। जिन्हें चिकित्सक द्वारा सिट्राजिन दवाई लिखी जाती है। यह दवाई भी अस्पताल में नहीं है। एक मरीज ने बताया कि उसने लीव-52 मांगी थी, दवाई भी अस्पताल में नहीं मिली।
उसे पेट में परेशानी है और चिकित्सक द्वारा अलकासिड लिखा गया है, जोकि दवा खिड़की पर नहीं मिला। अब उन्हें बाहर से यह सिरप लेना होगा। -जतिन, राम कॉलोनी
मां को खांसी थी। दवा दिलाने नागरिक अस्पताल में लेकर आया। चिकित्सक ने खांसी का सिरप तथा सिट्राजिन लिख दी। अस्पताल में यह दोनों ही दवाई नहीं मिली। उसे बाहर से दवाई खरीदनी पड़ी।
-सोनू, पेगां
एक हजार से 1200 तक होती ओपीडी
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से 1200 तक की ओपीडी होती है। नागरिक अस्पताल में दवाइयां स्वास्थ्य विभाग के कैथल में स्थित वेयर हाउस से आती हैं। दवाइयों का संकट ऐसा भी हो जाता है, जब वेयरहाउस में भी दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पाती। इसके लिए सिविल सर्जन को दवाई अपने स्तर पर खरीदने का अधिकार भी है। अस्पताल प्रशासन जब वेयरहाउस में दवाइयां उपलब्ध नहीं हों तो लोकल स्तर पर दवाइयां खरीद लेता है। ऐसे में जब तक वेयरहाउस में दवाइयां नहीं होती तो शहर से ही दवाइयां खरीदी जाती हैं। इसके लिए सरकार ने मापदंड तय किए हुए हैं कि कौन सी दवाई किस रेट में खरीदनी है।
वेयर हाउस से दवाइयों की सप्लाई होती है। वेयर हाउस में स्टॉक खत्म है। मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो, इसलिए वेयर हाउस से दवाइयां खरीदने के लिए अनुमति मांगी है। दवाइयां खरीदने के लिए कुछ प्रक्रिया होती है। जल्द ही मरीजों को दवाइयां उपलब्ध हो जाएंगी।
-डॉ. मंजू कादियान, सिविल सर्जन