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खरकभूरा के राजकीय उच्च विद्यालय के गेट पर विद्यार्थियों ने जड़ा ताला

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राजकीय उच्च विद्यालय खरकभूरा गांव के स्कूल के गेट पर ताला लगा प्रदर्शन करते हुए विद्यार्थी और ग्? - फोटो : Jind
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उचाना। शिक्षा विभाग की चिराग योजना एवं शिक्षकों के हुए तबादलों के विरोध में खरकभूरा के राजकीय उच्च विद्यालय एवं कन्या माध्यमिक विद्यालय के गेट पर विद्यार्थियों ने ताला लगा कर रोष प्रकट किया। घटना की जानकारी मिलने पर बीईओ विनय कुमार जिंदल पहुंचे। करीब तीन घंटे तक स्कूल गेट पर ताला लगा कर विद्यार्थियों, ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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विद्यार्थियों ने कहा कि स्कूल में ऑनलाइन तबादला नीति के तहत स्कूल से आधे शिक्षकों का तबादला हो चुका है। कन्या विद्यालय में दो अध्यापकों को छोड़ कर दूसरे शिक्षकों के तबादले हो चुके हैं। राजकीय उच्च विद्यालय में केवल सामाजिक, गणित, संस्कृत के शिक्षक ही कार्यरत हैं। तबादला होने से पहले दोनों विद्यालयों में सभी विषयों के शिक्षक मौजूद थे। विद्यार्थी एवं ग्रामीण खंड शिक्षा अधिकारी की ओर से समस्या का शीघ्र समाधान करने के आश्वासन पर ताला खोलने को तैयार हुए।
स्कूल प्रांगण में बीईओ के साथ की बैठक
खंड शिक्षा अधिकारी विनय जिंदल के साथ एसएमएसी, पूर्व सरपंच एवं गांव के प्रमुख लोगों ने बैठक की। ग्रामीणों ने मांग पत्र सौंपते हुए कहा कि सत्र के बीच में इस तरह से शिक्षकों के तबादले होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। अगर शिक्षकों के तबादले करने है तो अप्रैल माह में करना चाहिए। विद्यालय में प्रत्येक विषय का शिक्षक उपलब्ध करवाना चाहिए ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। मांग पत्र में तुरंत प्रभाव से राजकीय उच्च विद्यालय में अंग्रेजी, विज्ञान, हिंदी विषय के शिक्षकों के रिक्त पदों पर नियुक्त, कन्या विद्यालय में अंग्रेजी, सामाजिक, हिंदी, गणित, शारीरिक शिक्षक, ड्राइंग विषय शिक्षकों की नियुक्ति की मांग है जो रिक्त है। ग्रामीणों ने कहा कि कन्या माध्यमिक विद्यालय को किसी भी सूरत में राजकीय उच्च विद्यालय में मर्ज करने की योजना को पूरी नहीं होने देंगे। चाहे इसके लिए कोई बड़ा आंदोलन करना पड़ा।
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सरकार की मंशा में खोट
रामेश्वर, कालू, दीपू, रेखा रानी, सुदेश, सरोज, पूनम, शीला ने कहा कि सरकार नई शिक्षा नीति और चिराग जैसी योजनाओं के माध्यम से शिक्षा को आम जनता की पहुंच से बाहर करने की दिशा में काम कर रही है। शिक्षा के निजीकरण, केंद्रीयकरण और सांप्रदायिकिकरण की नीतियों को आगे बढ़ाने की कुचेष्टा की जा रही है। हरियाणा की चिराग योजना तो प्राइवेट स्कूलों को प्रोत्साहित करने और सरकारी स्कूलों को निरूत्साहित करने का सबसे गलत तरीका है, जिसे सरकार की मंशा में खोट स्पष्ट दिखाई देता है। आज 4800 सरकारी स्कूलों को मर्ज के नाम पर बंद किया जा चुका है। ऐसे-ऐसे स्कूलों को बंद किया जा रहा है जहां बच्चों की संख्या 500 से भी अधिक है। सार्वजनिक शिक्षा को बचाने के लिए मजबूत आंदोलन की आवश्यकता है।
प्रदेश सरकार ने हाल ही पदों के वैज्ञानिकीकरण के साथ मेगा ऑनलाइन ट्रांसफर ड्राइव चलाया गया है। ग्रामीणों और विद्यार्थियों की मांग को आज ही उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है। शीघ्र ही 30 सितंबर तक नए शिक्षक आने की संभावना है।
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-विनय जिंदल, खंड शिक्षा अधिकारी, उचाना।
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