13जेएनडी23 : उदयपुर गांव के खेतों में धान के अवशेषों में लगी आग बुझाते हुए कर्मचारी। संवाद
जींद। जिले में 1 अक्तूबर से अब तक 42 जगह पर धान के अवशेष जलाने के मामले आ चुके हैं। कृषि विभाग ने अवशेष जलाने वाले किसानों से 47500 रुपये जुर्माना वसूला है। इसके अलावा रेड जोन में आने वाले गांवों पर विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि वहां धान के अवशेष जलाने की कोई घटना न हो।
पिछले 13 दिन में कृषि विभाग को सैटेलाइट के माध्यम से 42 जगह पर धान के अवशेष जलाने की सूचनाएं मिली है। सूचना के आधार पर विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जानकारी सही पाई। पिछले दो दिन की बात करें तो पराली जलाने के 25 मामले सामने आ चुके हैं। शनिवार को 17 और रविवार को आठ मामले सामने आए हैं। रविवार को नरवाना में पांच जगह पराली जलाने का मामला सामना आया। इनमें दबलैन और दनौदा खुर्द में आग लगाई हुई मिली है। इसके अलावा ढाबी टेकसिंह, कोयल, दो जगह पिपलथा और एक-एक उचाना तथा संडील में मामले आए। इन पर विभाग की टीम ने किसानों से जुर्माना वसूला गया, हालांकि अभी तक जिले में इससे संबंधित एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। धान के अवशेषों में आए दिन आग लगाने की हो रही घटना को रोकने के लिए उपमंडल व ब्लॉक तथा ग्राम स्तर पर समितियां गठित की गई हैं, जो प्रत्येक क्षेत्र पर पैनी नजर रखी हुई हैं। कोई किसान फसल अवशेष में आग लगाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ विभाग सख्त कार्रवाई करता है। इसमें एफआईआर एवं जुर्माने का प्रावधान है। विभाग हर गांव में मुनादी भी करवा रहा है ताकि किसान पराली में आग न लगाएं।
फसल अवशेष जलाने पर दो एकड़ के लिए 25 सौ, दो से पांच एकड़ तक के लिए पांच हजार व उससे भूमि पर जलाने पर 25 हजार रुपये जुर्माना और कारागार का प्रावधान किया गया है। कृषि विभाग ने पराली जलाने के कारण गत वर्ष 24 गांवों को रेड जोन में शामिल किया था। सबसे ज्यादा गांव नरवाना क्षेत्र के शामिल थे।
जिले में अब तक 42 जगह धान के अवशेष जलाने की घटनाएं हुई हैं। अवशेष जलाने वाले किसानों से 47500 रुपये जुर्माना वसूला जा चुका है। किसानों से आह्वान है कि वे धान के अवशेष न जलाएं। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति कमजोर होती है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। -डॉ. गिरीश नागपाल, उप निदेशक, कृषि विभाग, जींद।
13जेएनडी23 : उदयपुर गांव के खेतों में धान के अवशेषों में लगी आग बुझाते हुए कर्मचारी। संवाद