संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। जिले में पराली जलाने के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। प्रशासन के मना करने के बाद भी किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं, जिससे जिले का प्रदूषण स्तर लगातार बढ़ रहा है। दो दिन में जिले में 17 जगह पराली जलाने की घटनाएं हुईं। अब तक जिले में 53 जगह पराली जलाई जा चुकी है और 53 किसानों पर एक लाख 12 हजार 500 रुपये जुर्माना भी वसूला जा चुका है।
पराली जलाने से जिले का एक्यूआई 200 के पार हो चुका था। हालांकि सोमवार सुबह हुई बूंदाबांदी के चलते जिले के एक्यूआई में गिरावट आई और जिले की हवा साफ हुई, जिससे एक्यूआई 126 तक आ गया। पिछले 20 दिनों में यह पराली जलाने के मामले आए हैं। हालांकि जिला प्रशासन पराली न जलाने को लेकर जागरूक कर रहा है लेकिन उसके बावजूद भी किसान पराली जा रहे हैं जबकि किसानों को चाहिए कि वह पराली को जलाने की बजाय आमदनी का जरिया बनाए, जिससे किसान की आमदनी भी बढ़े और पराली का भी प्रबंधन हो।
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जींद-जुलाना के किसान ज्यादा जागरूक
पर्यावरण के प्रति सबसे ज्यादा लापरवाह नरवाना और उचाना के किसान हैं। वे जिले में सबसे ज्यादा पराली जला रहे हैं। जींद, जुलाना और पिल्लूखेड़ा के किसानों ने पराली न जलाकर पर्यावरण बचाने के प्रति जागरूकता दिखाई है। जींद, जुलाना और पिल्लूखेड़ा में अब तक पराली जलाने के एक-एक मामले सामने आए हैं वहीं अलेवा में पांच, सफीदों में नौ और उचाना में 17 पराली जलाने के मामले आए हैं। इनके अलावा नरवाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा 19 जगह पराली जलाने की लोकेशन मिली है। वहीं हम जुर्माने की बात करें तो अलेवा में पराली जलाने पर 12500 रुपये जुर्माना लगाया गया है। जींद में पांच हजार, जुलाना और पिल्लूखेड़ा में 2500-2500 जुर्माना वसूला गया है। इसके अलावा सफीदों में 15 हजार, उचाना में 35 हजार और नरवाना में 40 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया है।
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रेड जोन में जिले के 24 गांव
कृषि विभाग ने पराली जलाने के मामले में जिले के 24 गांवों को रेड जोन में शामिल किया है। सबसे ज्यादा गांव नरवाना क्षेत्र के शामिल है। इनमें भाणा ब्राह्मण, दनौदा कलां, दनौदा खुर्द, धमतान साहिब, गुरथली, कालवन, खरल, पीपलथा, राजगढ़ ढोबी, सच्चाखेड़ा, उझाना शामिल है वहीं जींद का एकमात्र गांव ढिगाना और सफीदों का मुआना गांव रेड जोन में शामिल किया है। उचाना क्षेत्र के पांच गांव, जिनमें बडऩपुर, छात्तर, डूमरखा कलां, करसिंधु, उचाना खुर्द शामिल हैं। इसके अलावा अलेवा के बधाना, बिघाना डाहोला, दुड़ाना, नगूरां, पेगां को शामिल किया गया है।
वर्जन
जिला प्रशासन पराली न जलाने के प्रति किसानों को लगातार जागरूक कर रहा है। अगली फसल के लिए जमीन तैयार करने के चक्कर में किसान पराली में आग लगा रहे हैं जबकि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। अभी गेहूं फसल की बिजाई का कार्य शुरू होने में अभी काफी समय है। प्ले स्टोर पर एप के माध्यम से भी पराली की गांठ बनाने वाली मशीन को बुक किया जा सकता है। -डॉ. पंकज, एसडीएम, जींद