18जेएनडी33: विलाप करते हुए मृतक के माता-पिता व भाई। संवाद
सफीदों। हांसी ब्रांच नहर में नहाते वक्त डूबे युवक शुभम का शव 72 घंटे के बाद सफीदों से 10 किलोमीटर दूर छाप्पर गांव के पास नहर में उतराता हुआ मिला। सूचना पाकर शहर थाना सफीदों पुलिस व परिजन मौके पर पहुंचे। परिजनों ने मौके पर जाकर शव की शिनाख्त की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर नगर के नागरिक अस्पताल में रखवाया।
गौरतलब है कि आदर्श कॉलोनी सफीदों निवासी शुभम उर्फ बच्ची (28) रविवार को नहर में नहाने के लिए कूद गया और कुछ ही देर में पानी के आगोश में समा गया। शुभम गाड़ियों के साथ काम पर जाया करता था। सुबह को वह घर से यह कहकर गया था कि वह गाड़ी के साथ सरहिंद जा रहा है लेकिन वह गाड़ी पर जाने की बजाए नहर पर नहाने के लिए पहुंच गया। काफी तलाशने के बाद भी शुभम का कोई सुराग नहीं लगा। पीछे से नहर में पानी कम करवाकर स्थानीय लोगों सहित गोताखोर परगट सिंह ने करनाल से पहुंचकर नहर में सर्च अभियान चलाया था। लेकिन शुभम का कुछ पता नहीं चल पाया था। मंगलवार सुबह छाप्पर गांव के नजदीक से कोई राहगीर नहर की पटरी-पटरी आ रहा था और उसने देखा कि नहर में एक लाश तैरती हुई जा रही है। रास्ते में उसको शुभम के परिजन मिल गए और उसने इसकी जानकारी उनको दी। परिजन भी राहगीर द्वारा बताए गए स्थान पर पहुंचे। मामले की सूचना शहर थाना सफीदों पुलिस को दी गई। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नहर से बाहर निकलवाया। शव बाहर निकालने के बाद परिजनों ने उसकी शिनाख्त कर ली। अपने बेटे का शव देखकर उसके माता-पिता व अन्य रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल था। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर सफीदों के नागरिक अस्पताल में रखवाया और उसका पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया।
मृतक के भाई विकास ने कहा कि सफीदों में कोई गोताखोर नहीं है। प्रशासन ने हमें अपने खर्च पर गोताखोर बुलाने के लिए कहा गया। जब हमने गोताखोरों से बात की तो उन्होंने 10 हजार रुपये की डिमांड की लेकिन गरीब होने के कारण उनके पास गोताखोर बुलाने के लिए पैसे नहीं थे। उसके बाद उनके किसी रिश्तेदार ने करनाल से गोताखोर प्रगट सिंह को बुलाया और प्रगट सिंह ने उनसे मात्र आने-जाने का खर्चा लिया। वह नहरी विभाग के अधिकारियों के पास भी गया लेकिन कोई तत्काल कार्रवाई नहीं हुई और बहुत विलंब के बाद पीछे से पानी कम हुआ। विकास का कहना था कि वे गरीब थे इसी कारण उन्हें यह सबकुछ सहना पड़ा। अगर कोई पैसा वाला होता तो पीछे से नहर भी एकदम से बंद हो जाती और बड़े से बड़े गोताखोर पर यहां पहुंच जाते। विकास ने बताया कि शव देखने के बाद पाया कि उसके सिर में चोट लगी हुई थी।
18जेएनडी33: विलाप करते हुए मृतक के माता-पिता व भाई। संवाद
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