जींद। महाशिवरात्रि पर्व को लेकर जिले के शिवालय पूरी तरह से सज गए हैं। इसे लेकर मंदिरों में चल रही तैयारियों से वातावरण भी शिवमय हो गया है। शुक्रवार को सुबह से बम भोले के जयघोष गूंजने लगेंगे और यह पूरे दिन चलेंगे। महाशिवरात्रि पर्व को देखते हुए मंदिरों की विशेष सजावट की गई है। मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो, इसके लिए विशेष कदम उठाए गए हैं। इस दौरान शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करेंगे।
इस बार महाशिवरात्रि पर्व पर शिव योग, सिद्धि योग और चतुर्ग्रही योग का निर्माण हो रहा है। इन तीनों योगों का एक ही दिन पर बनना अद्भुत संयोग है, जोकि 72 वर्ष बाद पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त महाशिवरात्रि के दिन ही शुक्र प्रदोष व्रत बन रहा है। पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि 8 मार्च को शाम 9 बजकर 57 मिनट पर शुरू होकर अगले दिन 9 मार्च को सुबह 6 बजकर 17 मिनट पर समाप्त होगी। शिवजी की पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए इस बार 8 मार्च को ही महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। इस दिन शाम 6 बजकर 25 मिनट से लेकर 9 बजकर 28 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त बन रहा है। इसके अलावा महाशिवरात्रि की पूजा चार प्रहर में की जा सकती है। प्रथम प्रहर में भगवान शिव का दूध से अभिषेक किया जा सकता है। दूसरे प्रहर में दही से अभिषेक तीसरे प्रहर में शुद्ध देसी घी से अभिषेक और चौथे प्रहर में शहद से अभिषेक किया जा सकता है। महाशिवरात्रि के दिन शिव स्तुति, शिव मंत्र, शिव सहस्रनाम, शिव चालीसा, शिव तांडव, रुद्राष्टक, शिव पुराण और शिव आरती गाना फलदायी माने गए हैं।
जयंती देवी मंदिर में होगा रूद्राभिषेक कार्यक्रम
भगवान शिव की पूजा करते वक्त बेलपत्र, शहद, दूध, दही, शक्कर और गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से सारी समस्याएं दूर होती हैं। मांगी हुई मुरादें पूरी होती हैं। हर बार की तरह इस बार भी महाशिवरात्रि पर्व विशेष फलदायी है। भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने तथा व्रत रखने से विशेष फल मिलेगा। उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व पर रूद्राभिषेक का आयोजन किया जाएगा। भगवान शिव का दूध, दही, शहद और जल से अभिषेक और पूजन, स्तुतिगान किया जाएगा। महाशिवरात्रि पर्व पर चारों पहर की पूजा-अर्चना करने के साथ अभिषेक भी किया जाएगा। वहीं महाशिवरात्रि पर्व पर सफीदों गेट जींद शहर के प्राचीन भूतेश्वर मंंदिर में भंडारे का आयोजन किया जाएगा। -नवीन शास्त्री पुजारी जयंती देवी मंदिर।