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Jind News: ई टेंडरिंग और राइट टू रिकाल के विरोध में सरपंचों ने निकाली ट्रैक्टर यात्रा

Tue, 28 Feb 2023 12:49 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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जींद। ई-टेंडरिंग के विरोध में सोमवार को सरपंचों ने बीडीपीओ कार्यालय के बाहर ट्रैक्टर यात्रा निकालते हुए प्रधान प्रीति मनोहरपुर की अध्यक्षता में विरोध प्रदर्शन किया। लघु सचिवालय तक ट्रैक्टर-ट्राली में भरकर और आगे बीडीपीओ कार्यालय तक पैदल मार्च करते हुए सरपंच धरना स्थल पर पहुंचे। यहां सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। सरपंचों की मांगों को मनवाने के लिए सोमवार को उनके समर्थन में ब्लॉक समिति सदस्य भी धरने पर डटे रहे।
इस दौरान सरपंचों ने कहा कि सरकार अपने अड़ियल रवैये के कारण सरपंचों की मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं है, जबकि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि सरपंच और ब्लॉक समिति सदस्य भी अपने हकों की लड़ाई ही लड़ रहे हैं। इसलिए सरकार को अपनी हठधर्मिता छोडक़र गांव के विकास के लिए सरपंचों की मांग माननी चाहिए। सरपंचों की मांग है कि ई-टेंडरिंग को रद्द किया जाए, 20 लाख रुपये तक के कामों की पावर सरपंचों के हाथों में होनी चाहिए। सरपंचों का मानदेय 25 हजार रुपये प्रति माह किया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती उनका धरना जारी रहेगा।
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इस अवसर पर ब्लॉक समिति चेयरमैन राकेश तलोडा, खरकरामजी से सुरेंद्र सपंच, नरेश, अनिल लाठर, शमशेर, ब्लॉक समिति सदस्य गीता ललित खेड़ा, सविता, पूनम, ऊषा, रीतू, मुकेश मौजूद रहे।
फोटो कैप्शन 27जेएनडी26: तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए सरपंच।


महावीर कंप्यूटर ने दिया सरपंचों के धरने को समर्थन
संवाद न्यूज एजेंसी
सफीदों। हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष एवं कांग्रेसी नेता महावीर कंप्यूटर ने सोमवार को बीडीपीओ कार्यालय पहुंचकर सरपंचों के धरनों को अपना समर्थन दिया और सरपंचों की मांगों को जायज बतलाया। इस समर्थन के लिए सरंपच एसोसिएशन के अध्यक्ष निरवैर सिंह खरकड़ा ने महावीर कम्प्यूटर का आभार प्रकट किया।
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महावीर कंप्यूटर ने कहा कि आज जनप्रतिनिधियों को अपने हकों के लिए जिस प्रकार से आंदोलन करना पड़ रहा है, इससे साफ जाहिर हो रहा है कि प्रदेश की स्थिति अत्यंत विकट है तथा सरकार पूरी तरह से फेल है। जब चुने गए जनप्रतिनिधियों का है यह हाल है तो आम जनता की तो बिसात ही क्या है। चुने जाने के बाद सरपंचों ने अपना कार्यभार भी नहीं संभाला था कि सरकार ने तानाशाही दिखाकर उनसे उनके हक छिन लिए और उन्हे धरने पर बैठना पड़ा। हरियाणा सरकार अपने रवैये से गांव की छोटी सरकार के हाथों को राइट-टू-रिकॉल कानून व ई-टेंडरिंग के माध्यम के हाथ बांधने का कार्य किया है।
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