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मस्तिष्क के लिए संस्कार साफ्टवेयर के समान : डॉ. पुष्पेंद्र

Sun, 17 Mar 2024 02:52 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में शनिवार को विकसित भारत के निर्माण में भारतीय भाषाओं की भूमिका विषय पर अखिल भारतीय भाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया। भारतीय भाषा समिति, शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से भारतीय शिक्षण मंडल और हरियाणा प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन की शुरुआत भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष चामू कृष्ण शास्त्री के संदेश से हुई।
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मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय सह-प्रमुख शालेय प्रकल्प डॉ. पुष्पेंद्र राठी और विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय सह-प्रमुख युवा आयाम डॉ. जसपाल कौर ने शिरकत की। मुख्य वक्ता डॉ. कुलदीप सिंह रहे। मंच संचालन प्राध्यापक डॉ. वीरेंद्र कुमार और डॉ. सुमन पूनिया ने किया। मुख्य संरक्षक कुलपति डॉ. रणपाल सिंह ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, शोधार्थियों का स्वागत किया। मुख्य अतिथि डॉ. पुष्पेंद्र राठी ने कहा कि जिस प्रकार मधुमक्खी अनेक पुष्पों से रस एकत्रित करती है उसी प्रकार ज्ञान-पिपासु विद्यार्थी को भी विभिन्न भाषाओं के माध्यम से ज्ञान अर्जित करना चाहिए। हमारी दैनिक दिनचर्या से हमारे संस्कारों का पता चलता है, तथा संस्कार हमारे मस्तिष्क के लिए साफ्टवेयर के समान होता है। विशिष्ट अतिथि डॉ0 जसपाल कौर ने बताया कि यह सम्मेलन विद्यार्थी केंद्रित है। विद्यार्थी भारत का भविष्य है। उन्होंने भारतीयता व भाषा के साथ सह-सम्बन्ध स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस सम्मलेन में विश्वविद्यालय और अन्य महाविद्यालयों के 371 शोधार्थियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों आदि के द्वारा पंजीकरण करवाया गया। जिसमें 187 शोध-पत्रों का प्रस्तुतीकरण पाँच अलग-अलग कक्षों में समानांतर रूप से करवाया गया।

इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र भारद्वाज, डॉ. बलबीर शास्त्री, डॉ. विपिन गुप्ता, डॉ. दर्शना, प्रो. एसके सिन्हा, डॉ. सुमिता आशरी, डॉ. नीरू गुप्ता, डॉ. हुमा, डॉ. दिलबाग शास्त्री, डॉ. पवन, डॉ. मंजू रेढू, डॉ. ज्योति मलिक, डॉ. मंजू सुहाग, डॉ. बृजपाल आदि उपस्थित रहे।
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भारतीय ज्ञान परंपरा की विरासत है अत्यंत समृद्ध

डॉ. कुलदीप सिंह ने पंजाबी और हिंदी भाषा के माध्यम से कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की विरासत अत्यंत समृद्ध है। हमें भारत की अन्य भाषाओं में भी उसका अनुवाद करने और संकलन करने की आवश्यकता है। उन्होंने देश के महापुरुषों के माध्यम से मातृभूमि की रक्षा करने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के अनुरूप ही आज के युवाओं को स्वयं ही अपने जीवन तथा क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। हमारी एकता में ही समस्त ऐश्वर्य निहित हैं।
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