जींद। पंचायत विभाग हरियाणा ने ग्रामीण सफाई कर्मियों, चौकीदारों और ट्यूबवेल ऑपरेटर की मोबाइल एप के माध्यम से हाजिरी लगाकर सरपंच को मानदेय, वेतन भुगतान का बिल बनाने का अधिकार देने के रोष स्वरूप प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
सीटू जिला सचिव रमेश ने कहा कि सरकार इन कर्मियों को शोषण और बेगार की दलदल में धकेलना चाहती है। इसको सीटू किसी भी सूरत में सहन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा समर्थित सरपंच एसोसिएशन की मांग पर मुख्यमंत्री ने मोबाइल एप में ऑनलाइन हाजिरी लगाकर मानदेय भुगतान का बिल बनाने का अधिकार सरपंच को देने का निर्णय कर्मचारी विरोधी है। हरियाणा में किसी भी चुने हुए प्रतिनिधि को किसी कर्मचारी की हाजिरी लगाने का अधिकार नहीं है तो सफाई कर्मियों, चौकीदारों और जल कर्मियों का बिल बनाने का अधिकार सरपंच को क्यों दिया जा रहा है। ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन के जिला कार्यकारी प्रधान ईश्वर सिंह ने कहा कि इस व्यवस्था से सरकार अपने कुछ चहेतों को निजी कर्मचारी उपलब्ध करवा रही है। इससे हर रोज गांव स्तर पर पंचायतों और कर्मचारियों के बीच झगड़े पैदा होंगे और कर्मी गुलाम बनकर रह जाएंगे। उन्होंने मांग की कि सरकार की अपनाई जा रही ऑनलाइन प्रणाली के बजाय ऑफलाइन हाजिरी लगाई जाए। हाजिरी लगाने का अधिकार ग्राम पंचायत के बजाय पांच-छह गांवों का जोन बनाकर सुपरवाइजर की भर्ती कर उसे सौंपी जाए। इस ऑनलाइन हाजिरी व्यवस्था के खिलाफ अगले तीन दिन 7 मार्च तक जिला, ब्लॉक स्तर पर धरने आयोजित किए जाएंगे। उसके बाद अगला निर्णय लिया जाएगा। इस अवसर पर कृष्ण मोरखी, पवन कुमार, कृष्ण, गुलाब, यशपाल, कपूर सिंह मौजूद थे।