संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। समय से पहले तापमान में लगातार हो रही वृद्धि गेहूं व सरसों की फसल के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। पिछले एक सप्ताह से अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा है। अगर तापमान में इसी तरह वृद्धि होती रही तो यह गेहूं व सरसों की फसलों को नुकसान पहुंचाएगा। इसका प्रभाव उत्पादन पर पड़ेगा। किसान इस समय एक बारिश का इंतजार कर रहे हैं। अगर बारिश होती है तो यह दोनों ही फ सलों के लिए फायदेमंद होगी।
मौसम में अचानक से बदलाव आया है और पारा 25 डिग्री तक पहुंच गया है। मौसम में हुए इस बदलाव का प्रभाव फसलों पर पड़ सकता है। सबसे ज्यादा प्रभाव सरसों में विशेषकर पछेती बुआई की फसल पर चेपा कीट आक्रमण कर सकता है। क्योंकि यह मौसम चेपा कीट के लिए बिल्कुल अनुकूल है। अगर चेपा कीट फसल के सपंर्क में आता है तो सरसों व गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचाएगा। इसके अलावा तापमान में बढ़ोत्तरी से गेहूं की फसल में दीमक व सरसों चेपा की गिरफ्त में आ सकती है और उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। जिले में किसानों ने लगभग सवा लाख हेक्टेयर से अधिक में गेहूं तथा 10 हजार हेक्टेयर से अधिक में सरसों की बिजाई की हुई है।
किसान लगातार करें खेतों का दौरा
बदलते मौसम में गेहूं व सरसों फसल पर कीटों का प्रभाव न पड़े इसके लिए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को फसलों की नियमित रूप से निगरानी करते रहने की सलाह दी है, ताकि फसल में लगने वाले रोगों का समय पर नियंत्रण किया जा सके और नुकसान से बचा सके। अभी गेहूं फसल में अल व चेपा दिखाई नहीं दे रहा। ऐसे में सरसों उत्पादक किसानों को विशेष ख्याल रखने की जरूरत है। फसल में अल या अन्य परजीवी देखने पर किसान कृषि विशेषों से सलाह ले सकते हैं। अगर गेहूं में कहीं पर निशान दिखाई दे रहे है तो उनकी फूंगल को तोड़ दें।
अल परजीवी दिखने पर तुरंत करें कीटनाशक का प्रयोग
दिन में तापमान ज्यादा तो रात को कम होने के कारण सीधा असर फसलों पर पड़ता है। अगर बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो कीटनाशक का प्रयोग करें। अगर बारिश होती है तो फसलों में बीमारी हट जाएगी।
पिछले एक सप्ताह का तापमान (सेल्सियस में)
तिथि
अधिकतम तापमान
न्यूनतम तापमान
12 फरवरी
22 डिग्री
08 डिग्री
11 फरवरी
26 डिग्री
09 डिग्री
10 फरवरी
27 डिग्री
13 डिग्री
09 फरवरी
27 डिग्री
09 डिग्री
08 फरवरी
24 डिग्री
10 डिग्री
07 फरवरी
26 डिग्री
11 डिग्री
06 फरवरी
26 डिग्री
11 डिग्री
किसान लगातार खेतों का भ्रमण करें : डॉ. राजेश
कृषि विभाग के मौसम वैज्ञानिक डॉ. राजेश ने बताया कि मौसम बीमारियों के अनुकूल बना हुआ है। किसान लगातार खेतों का भ्रमण करते रहें। अगर अल परजीवी दिखे तो कीटनाशक का प्रयोग करें। किसान लगतार सरसों के फूूलों व पत्तों को भी देखते रहें। कीटनाशक के साथ जरूरत के हिसाब से फसलों में सिंचाई करें।