जींद। रोहतक पीजीआई में पुलिस वैन में महिला कैदी के साथ हुआ दुष्कर्म का मामला तूल पकड़ने लगा है। पीड़ित महिला ने पुलिस अधिकारियों पर बंदियों को गार्ड रूप में भेजने के आरोप लगाए हैं, जबकि जेल अधीक्षक ने साफ मना करते हुए पुलिस कर्मचारियों को ही गार्ड के रूप में भेजने की बात कही है। अब इस मामले की रोहतक पुलिस जांच करेगी। जेल अधीक्षक ने भी एक कमेटी बनाकर अपनी जांच शुरू कर दी है।
महहाल ने आरोप लगाया कि जिसने उसके साथ दुष्कर्म किया है उसे वह भाई कहकर बुलाती थी, मगर छह महीने पहले उसने उसे भाई की जगह जीजा कहने के लिए कहा। वह बीमार रहती थी, इस कारण उसका इलाज पीजीआई रोहतक से चल रहा है। उसने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन जेल के बंदियों को ही गार्ड के रूप में भेजता था। इसी का फायदा उठाकर आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। महिला के साथ दुष्कर्म की घटना 20 फरवरी की है। महिला ने कहा कि उसकी जमानत होने वाली थी, इसलिए वह इतने दिन चुप रही। आरोपी उसे धमकी भी देते थे।महिला ने आरोप लगाया कि एक साल से जेल प्रशासन सतीश को गार्ड के रूप में उसके साथ पीजीआई रोहतक भेजता था।
छह महीने से कर रहे थे परेशान
महिला कैदी ने कहा कि वह आरोपी मनीष तथा सतीश उसे छह महीने से परेशान कर रहे थे। वह बार-बार उसकी शिकायत करते थे। इससे उसे डांट पड़ती थी। आरोपी उसे दवा नहीं लेने देने तथा अधिकारियों का डर दिखाकर डराते थे।
जिन बंदियों और कैदियों को उपचार के लिए भेजा जाता है, उनके साथ गार्ड के रूप में हमेशा पुलिस कर्मचारियों को भेजा जाता है। किसी भी बंदी या कैदी को बाहर नहीं भेजा जाता। हमेशा पुलिस को ही गार्ड बनाया जाता है। किस कैदी या बंदी का कहां पर इलाज करवाया जाए, इसके बारे में निर्णय मेडिकल ऑफिसर करते हैं। जेल प्रशासन अपनी तरफ से भी इस मामले की जांच कर रहा है। -संजीव कुमार, जेल अधीक्षक, जींद।