रागी जत्था कीर्तन करते हुए। संवाद
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जींद। समाजसेवी संस्था सुखमनी सेवा सोसाइटी द्वारा रविवार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाशोत्सव को समर्पित 18वां गुरमत समागम भारत सिनेमा रोड स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में धूमधाम से मनाया गया। संगतों ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष शीश नवा कर अपने गुरु के प्रति आस्था प्रकट की।
गुरु घर के प्रवक्ता बलविंदर सिंह ने बताया कि इस गुरमत समागम में सबसे पहले गुरुद्वारा साहिब के रागी भाई गुरदित्त सिंह एवं भी ऋषिपाल सिंह के जत्थे द्वारा गुरबाणी गायन की गई। उन्होंने अपनी बणी के माध्यम से बताया कि गुरु अर्जन देव ने गुरु नानक साहब, गुरु अंगद देव, गुरु अमरदास, गुरु रामदास एवं अपनी बाणी एवं 15 संत व कवियों कबीर दास, रविदास, नामदेव, रामानंद, जयदेव, शेख फरीद एवं 11 भट्टरों की बाणी को शामिल करके गुरु ग्रंथ साहिब की स्थापना सन 1604 में श्री हरिमंदिर अमृतसर में किया। उसके उपरांत गुरु गोबिंद सिंह ने गुरू तेग बहादुर की कमी दर्ज करके वर्श 1706 में गुरु ग्रंथ साहिब को गुरु गद्दी पर आसीन किया और कहा सब सिखून को हुकूम है गुरु मानयो ग्रंथ।
अंबाला से आए जाने-माने कथावाचक ज्ञानी तरसेम सिंह अपने कथा प्रवचनों द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब की महत्ता के बारे में संगतों को जानकारी देते हुए कहा कि इस पवित्र ग्रंथ में गुरुओं, भक्तों की बाणी पर हम सभी को अमल करना चाहिए। हमेशा सच के मार्ग पर चलना चाहिए। अपने मन को परमात्मा के मन से जोडना चाहिए। जरूरतमंद लोगों की मदद हमेशा करनी चाहिए। गुरूघर के प्रवक्ता बलविंद्र सिंह ने कहा कि अच्छ ी सोच से ही इंसान को हमेशा अच्छा रास्ता मिलता है। ईश्वर पर वही भरोसा कर सकता है, जो खुद पर भरोसा करता हो और ईश्वर को वही व्यक्ति प्राप्त कर सकता है जो सबसे प्रेम करता हो। इस धरती पर व्यक्ति अपने कर्म के अनुसार ही फल पाएगा। जो जैसा बोएगा, वैसा ही पाएगा। व्यक्ति को अपने कर्म ईमानदारी से करने चाहिए। गुरमत समागम के पश्चात गुरु का अटूट लंगर भी संगतों में बरताया गया।