जींद। रेलवे स्टेशन के पास स्थित सिंह सभा गुरुद्वारा में रविवार को कलगीधर पातशाह गुरु गोविंद सिंह के प्रकाशोत्सव की खुशी में गुरमत समागम का आयोजन किया गया। इस दौरान विभिन्न समुदायों के लोगों ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेका।
गुरमत समागम में सबसे पहले श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ का भोग डाला गया। भाई संतोख सिंह और भाई जसवंत सिंह ने गुरुबाणी गायन किया गया। फिर गुरु का अटूट लंगर बरताया गया। भाई संतोख सिंह ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह को त्याग और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। उनके जीवन का प्रथम दर्शन था कि धर्म का मार्ग सत्य का मार्ग है। गुरु साहबान ने कहा था कि जो व्यक्ति दिन और रात परमात्मा का ध्यान करता है, उसके लिए मैं खुद को बलिदान करता हूं। समाजसेवा में हमेशा अपनी कमाई का दसवां भाग दान में दें। भाई जसवंत सिंह ने संगत से आह्वान किया कि गुरु गोविंद सिंह ने अपनी बाणी में स्पष्ट किया है कि शरीर को नुकसान पहुंचने वाले किसी भी प्रकार के नशे और तंबाकू आदि का सेवन न करें। किसी भी इंसान की चुगली-निंदा ना करें। इससे बचें। इंसान से प्रेम करना ही, ईश्वर की सच्ची आस्था और भक्ति है।
गुरु घर के प्रवक्ता बलविंद्र सिंह ने कहा कि गुरु ने अपनी बाणी में कहा कि दुखी व्यक्ति, विकलांग व जरूरतमंद इंसान की सदैव हृदय से मदद करें। अपने द्वारा किए गए सारे वादों पर हमेशा खरा उतरने की कोशिश करें।
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गुरु गोविंद सिंह ने कुरीतियों के खिलाफ की आवाज बुलंद
गुरमत समागम में मुख्य अतिथि डॉ. कामिनी आशरी ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने समाज में व्याप्त सती प्रथा, बाल विवाह, बहु विवाह आदि कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनके शौर्य और पराक्रम का देश हमेशा ऋणी रहेगा। गुरु गोविंद सिंह के शब्द थे कि असहाय लोगों पर अपनी तलवार या शक्ति का प्रदर्शन कभी नहीं करना चाहिए। अच्छे कर्मों से तुम्हें सच्चे गुरु की प्राप्ति होती है। साथ ही ईश्वर का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रधान जसबीर सिंह, अशोक छिब्बर, कमलजीत ग्रेवाल, जसपाल सिंह, आज्ञापाल सिंह, अमरीक सिंह, रतन सिंह, किरपाल सिंह, परमजीत सेठी, तिलक राज, प्रवीन मौजूद रहे।