सफीदों शहर से गुजरने वाला पानीपत रोड, जो पूरी तरह से गड्ढे में तब्दील हो चुका है। संवाद
सफीदों। नगर और क्षेत्र की खराब सड़कें चुनावी मुद्दा बन गई हैं। सफीदों के चारों ओर कोई ऐसी सड़क नहीं है जो सही हो। जनता इन खराब सड़कों का दंश लंबे अर्से से झेल रही है। सड़कों के हालात ये हैं कि सड़कों में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क है। इन सड़कों में पड़े गड्ढों में कोई रोड़ा तक डालने वाला नहीं है। इन सड़कों की खराब हालत की तरफ न तो सत्ता पक्ष का ध्यान रहा और न ही स्थानीय अधिकारियों का। किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सत्ताधारी नेताओं से सड़कों के हालात पर प्रश्न पूछ लिया जाता, तो वे कहते थे कि उन्होंने 152-डी व जम्मू-कश्मीर हाईवे बनवा दिया, लेकिन धरातल की समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। न ही उन्होंने सफीदों की सड़कों को 152-डी जैसा बनवाया।
सफीदों-जींद हाईवे, सफीदों-पानीपत हाईवे, नगर का खानसर चौक, सफीदों बाईपास, असंध रोड, रेलवे रोड, महात्मा गांधी मार्ग व रामपुरा रोड के अलावा कोई भी रोड सही नहीं है। टूटी हुई सड़कों के कारण कई हादसे हो चुके हैं। टूटी हुई सड़कों को लेकर वाहन चालक शासन व प्रशासन को कोसते हुए निकलते हैं। आए दिन मुख्य सड़कों के टूटे होने के कारण वाहन चालक कई बार घायल हो चुके हैं। सफीदों शहर निवासी, आसपास के दुकानदार और स्कूलों में जाने वाले बसों में बच्चे भी काफी परेशान रहते हैं। अक्सर स्कूली बसों के पलटने का भी खतरा बना रहता है।
समस्या सुनने वाले अधिकारियों के दरवाजे पर भरा रहता है पानी
सफीदों शहर निवासी अगर अपनी समस्या लेकर अधिकारियों के पास लघु सचिवालय में जाएंगे तो वहां भी उन्हें बारिश का पानी भरा हुआ मिलेगा। लघु सचिवालय का मैदान व उसकी सड़के बिल्कुल टूटी-फूटी पड़ी हैं। बारिश होने के बाद लघु सचिवालय में भरे पानी से निकलने तक का रास्ता नहीं रहता है। लोग यह सोचते हैं कि जब अधिकारियों के कार्यालयों का यह हाल है, तो उनकी कौन सुनेगा और कौन उनकी समस्या का समाधान करेगा।
रेहड़ी-रिक्शा चालक ने गड्ढों में डलवाया था रोड़ा
सफीदों में सड़कों की बदहाल अवस्था को लेकर कोई सुनवाई नहीं है। नगर की सड़कों से रेहड़ी व रिक्शा में सामान ढुलाई का कार्य होता है। इस व्यवसाय से दर्जनों लोग जुड़े हुए हैं। गांवों से भी काफी लोग सामान लेने के लिए सफीदों के बाजारों में आते हैं। रिक्शा व रेहड़ी वाले सामान भरकर इन मार्गों से होकर गुजरते हैं, तो उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। कई बार उनकी रेहड़ी या रिक्शा गड्ढों में फंस जाता था और उनमें लदा हुआ सामान सड़क पर गिर जाता था। कई बार रिक्शा व रेहड़ी चालक गिरकर चोटिल हो जाते थे। शासन व प्रशासन की ओर से कुछ होता न देखकर रेहड़ी व रिक्शा चालक ने पैसे एकत्रित करके रेलवे रोड व महात्मा गांधी मार्ग के गड्ढों में रोड़ा लगवाया।