संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। शहर की आबोहवा अभी भी ठीक नहीं हैं। अभी भी जींद रेड जोन में बना हुआ है। इसके चलते लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग घरों से मास्कर लगाकर ही बाहर निकल रहे हैं। रविवार को जींद का एक्यूआई स्तर 458 से घट कर 393 पर पहुंच गया। अभी भी जींद की हवा बेहद वैरी पूअर श्रेणी (लंबे समय तक एक्सपोजर पर सांस की बीमारी होने का खतरा) में है। इसी के चलते वृद्ध, छोटे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और सांस के मरीजों परेशानी को परेशानी हो रही है।
रविवार को धूप निकली और पर्यावरण प्रदूषण में कमी आई। इसके चलते प्रदूषण का स्तर दिन में 393 पर पहुंच गया। सुबह ही धूप खिलने के बाद से स्थिति में सुधार होने लगा। हालांकि अभी भी हवा वैरी पूअर कैटेगरी में आती है लेकिन जींद डार्क रेड जोन से निकल रेड जोन में पहुंच गया है। गौरतलब है कि 0-50 स्वास्थ्य के लिए बेहद अच्छा, 51-100 संतोषजनक (संवेदनशील लोगों को सांस लेने में मामूली तकलीफ), 101-200 संतुलित (फेफड़े, दमा और हृदय रोग से लोगों को सांस लेने में तकलीफ ), 201-300 पूअर (लंबे समय तक एक्सपोजर पर ज्यादातर लोगों को सांस लेने में तकलीफ ), 301-400 वैरी पूअर (लंबे समय तक एक्सपोजर पर सांस की बीमारी होने का खतरा), 400-500 बेहद गंभीर जो स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित करता है और सांस की बीमारियों वाले लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। रविवार को आसमान भी कुछ हद तक साफ रहा जिससे पर्यावरण प्रदूषण में सुधार हुआ। अभी भी लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।
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यह है पिछले एक सप्ताह का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडक्स)
तिथि
एक्यूआई (पीएम 2.5)
पांच नवंबर
393
चार नवंबर
458
तीन नवंबर
447
दो नवंबर
412
एक नवंबर
407
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सुबह व शाम सैर से करें परहेज : डाॅ. भोला
नागरिक अस्पताल के डिप्टी एमएस डा. राजेश भोला ने कहा कि जींद की आबोहवा अभी भी वैरी पूअर श्रेणी में है। ऐसे में बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण सांस व एलर्जी के मरीजों के लिए खतरनाक होता है। अभी भी वृद्ध सुबह व शाम के समय सैर से परहेज करें।