04जेएनडी12: पिंडतारक तीर्थ में डूबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद
जींद। पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर रविवार को हरियाली अमावस्या के चलते श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान कर पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। अल सुबह से ही लोग सरोवर में स्नान तथा पिंडदान शुरू कर दिए थे, जो मध्याह्न के बाद तक चलता रहा। श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने के बाद सूर्य को जलार्पण किया ।
पिंडतारक तीर्थ के संबंध में मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की थी। बाद में सोमवती अमावस्या पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया था। तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग आते हैं।
पितृ दोष से मुक्ति के लिए हरियाली अमावस्या को महत्वपूर्ण माना गया है। हरियाली अमावस्या के दिन स्नान, दान, पितरों का तर्पण करने से जीवन में खुशहाली बनी रहती है। इस दिन श्रद्धानुसार जरूरतमंद लोगों को दान करना चाहिए। -नवीन शास्त्री, पुजारी जयंती देवी मंदिर, जींद।
04जेएनडी12: पिंडतारक तीर्थ में डूबकी लगाते श्रद्धालु। संवाद