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जल संकट से उभरने के लिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत : प्रोफेसर डॉ. हरिओम

Sun, 02 Mar 2025 12:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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01जेएनडी31-पीजी कॉलेज में हुए सेमिनार में मौजूद अतिथिगण व विद्यार्थी। संवाद
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जींद। राजकीय पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में जल संरक्षण विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता प्राचार्या डॉ. तनाशा हुड्डा ने की। सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता भूगोल विभाग के प्रोफेसर डॉ. हरिओम ने शिरकत की। इस मौके पर एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. जयविंद्र शास्त्री और रीनू देवी भी मौजूद रही। प्रोफेसर डॉ. हरिओम ने कहा कि भारत में जल स्तर के घटने और प्रदूषित जल से भारत की जनसंख्या का एक बहुत बड़ा भाग जल संकट से जूझ रहा है। पृथ्वी पर कुल उपलब्ध जल का 97 प्रतिशत भाग खारा पानी के रूप में है और केवल तीन प्रतिशत भाग पीने योग्य है। उस तीन प्रतिशत भाग में भी दो प्रतिशत भाग बर्फ के रूप में है और एक प्रतिशत भाग मीठा जल झील, मिट्टी, बहती नदियां और वनस्पति में निहित है। अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के अनुसार अगले 30 वर्षों में जल की मांग भारत में 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। भारत में जल की मांग सबसे अधिक सिंचाई, घरेलू उपयोग, उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ रही है। भारत में इस समय लगभग 60 करोड़ लोग जल के संकट से जूझ रहे हैं। प्रतिवर्ष दो लाख लोग जल की कमी और जल से फैलने वाली बीमारियों के कारण अपनी जान गवां रहे हैं। जल संकट से उभरने के लिए लोगों को दो मोर्चों पर कार्य करना होगा। प्रथम जल को प्रदूषित और बर्बाद होने से बचाना होगा और दूसरा जल का संरक्षण करना होगा। जल के संरक्षण में पुराने तालाबों का नवीकरण एवं नए जलाशयों का निर्माण, नदियों का नियोजन, बांधों के निर्माण से वर्षा जल संग्रहण करना, मकान के साथ वर्षा जल संग्रहण टैंक बनाना, स्कूल, कॉलेज और संस्थानों में जल संग्रहण करके समय-समय पर उनकी देखरेख करना आदि सम्मिलित हैं।
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