जींद। रोडवेज बेड़े में शामिल की गईं 11 नई बसों की पासिंग आरटीए के तबादले के कारण अटक गई है। अब इन नई बसों की पासिंग सोमवार तक होने की उम्मीद है। हालांकि अभी नए आरटीए ने ज्वाइन नहीं किया है, लेकिन एसडीएम के माध्यम से नई बसों की पासिंग करवाई जाएगी। इसके बाद उनको रुट पर उतार दिया जाएगा। बिना पासिंग के वर्कशॉप में खड़ी नई बसें धूल फांक रही है। नई बसों के डिपो में आते ही रोडवेज कर्मचारियों ने उनकी पासिंग से जुड़े कागजात की प्रक्रिया पूरी करवा चुके हैं, पर किन्ही कारणों से उनकी पासिंग नहीं हो पाई थी। अब आरटीए के तबादले के चलते पासिंग का कार्य रुक गया है।
रोडवेज डिपो में 25 फरवरी को 11 नई बसें शामिल की गई थीं। इन बसों की पासिंग तीन मार्च को होनी थी, मगर बाद में तकनीकी कारणों से 5 मार्च की तारीख निर्धारित कर दी गई थी। फिर आरटीए के तबादले के कारण पासिंग प्रक्रिया अटक गई। डिपो में नई 11 बस आने के बाद रोडवेज बसों की संख्या 203 हो गई हैं। इनमें से 192 बस रूट पर चल रही हैं। इनमें किलोमीटर स्कीम की 37 बसें शामिल हैं। इस समय डिपो में 267 परिचालक व 243 चालक हैं। 1.7 नॉर्म के हिसाब से ओवरटाइम शून्य करने के लिए डिपो में 203 बसों पर 345 चालक और परिचालक की जरूरत है। रोडवेज बसों की पासिंग होने के बाद रूट पर उतारा जाएगा और यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी।
नई बसों के आने से कर्मचारियों की बनी दिक्कत
रोडवेज बेड़े में नई बसों के शामिल होने से डिपो के पास चालक-परिचालक की कमी हो गई। अब सभी बसों को रूट पर भेजने के लिए डिपो को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी, क्योंकि डिपो ने चालक-परिचालकों को अवकाश भी देना होता है और ड्यूटी पर भी करवानी है। ऐसे में चालक-परिचालकों की कमी के चलते यह दिक्कत आ रही है। परिवहन विभाग की ओर से एचकेआरएन के तहत 30 परिचालक भेजे जाने हैं। इससे पहले भी एचकेआरएन के तहत 23 परिचालकों की भर्ती डिपो में हो चुकी है। जींद डिपो की 192 बसों में हर रोज 17 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। इससे डिपो को हर रोज 13 लाख रुपये से अधिक का राजस्व मिलता है।
रोडवेज बेड़े में 11 नई बसें आई हुई हैं। पिछले दिनों आरटीए के तबादले के चलते उनकी पासिंग प्रक्रिया अटक गई है। अब सोमवार को नई बसों की पासिंग होने की उम्मीद है। पासिंग के बाद इनको रूट पर उतारा जाएगा, ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके। -जसमेर खटकड़, डीआई, रोडवेज डिपो जींद।