जींद। ओजोने दिवस को लेकर हिंदू कन्या कॉलेज के भूगोल विभाग की ओर से ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज प्राचार्य डॉ. पूनम मोर ने की। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में राजकीय महाविद्यालय अलेवा के असिस्टेंट प्रोफेसर राजेश कुमार ने भाग लिया।
राजेश कुमार ने बताया कि बताया कि साल 1994 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 16 सितंबर को ओजोन दिवस घोषित किया था, जबकि ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों पर ‘मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल’ पर 16 सितंबर 1987 को हस्ताक्षर किए गए थे। ओजोन परत समताप मंडल में पाई जाने वाली वह महत्वपूर्ण परत है, जो पृथ्वी को सूर्य की पराबैंगनी किरणों से बचाती है। ओजोन परत को बचाने के लिए भारत कई तरह के प्रयास कर रहा है। ओजोन परत को बचाने के लिए छात्राओं को आधुनिक जीवन शैली में बदलाव करने का आह्वान किया। इसके साथ उन्होंने छात्राओं को अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि पिछले कई दशकों से वायुमंडल में बढ़ रही ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन ने ओजोन परत को बहुत नुकसान पहुंचाया हैं। इस प्रोटोकॉल के लागू होने के 30 साल बाद 2017 में पाया गया कि ओजोन परत में छेद बंद हो रहा है। अगर हम ओजोन परत को बचाने के प्रयास इसी तरह से करते रहे, तो यह छेद खत्म हो जाएगा। इस अवसर पर आरती सैनी, रंजना, रजनी, आरती सैनी, नीलम नेहरा, अंजू मौजूद रहीं।