जींद। नगर परिषद में विवाह पंजीकरण करने का काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने 65 में से 52 फाइलें ही गायब कर दी। जांच अधिकारी के सामने उसने जो 13 फाइलें प्रस्तुत की, उनमें भी काफी घालमेल मिला। जांच अधिकारी ने कर्मचारी को रूल सात के तहत चार्जशीट करने के निर्देश दो वर्ष पहले दिए थे, लेकिन आज तक यह कर्मचारी अपना कार्य कर रही हैं। चार्जशीट की बात तो दूर आज तक इस पर कोई विभागीय कार्रवाई भी नहीं हुई है।
शहर में विवाह पंजीकरण का कार्य नगर परिषद में किया जाता है। नगर परिषद ही विवाह पंजीकरण के प्रमाण-पत्र जारी करता है। 14 अक्तूबर को किसी ने सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज करवाई की विवाह पंजीकरण में काफी गोलमाल किया जा रहा है। यहां बैठे कर्मचारी मनमानी फीस वसूल रहे हैं। इसके अलावा एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद विवाह पंजीकरण के लिए संबंधित वार्ड के पार्षद की स्टेटमेंट फोटो सहित लेनी होती है, लेकिन किसी भी मामले में इस नियम का पालन नहीं किया गया। इसके अलावा एक वर्ष बाद एसडीएम या डीसी से विवाह पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी करने की अनुमति लेनी होती, ऐसा भी किसी केस में नहींं किया गया। शिकायत की जांच सफीदों के तत्कालीन आईएएस एसडीएम आनंद शर्मा को सौंपी गई। एसडीएम ने जांच की तो संबंधित कर्मचारी 65 में से 13 फाइल ही एसडीएम के सामने प्रस्तुत कर सकी तथा बाकी के गुम होने के बारे में बताया। एसडीएम ने जब इन 13 फाइलों की जांच की तो इनमें भी काफी अनियमितताएं पाई गई। एसडीएम ने फरवरी 2022 में अपनी जांच में कर्मचारी को दोषी करार देते हुए रूल सात के तहत चार्जशीट करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज तक न तो उन गायब हुई 52 फाइलों को ही ढूंढ़ा गया और न ही कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई।
फिलहाल मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इसके बारे में पता करवाया जाएगा। यदि इस प्रकार के कोई आदेश जारी हुए हैं, तो उन पर कार्रवाई जरूर की जाएगी।
अशोक डांगी, सचिव नगर परिषद