उचाना। शहर के प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर पुजारी भारतेंदु शांडिल्य ने कहा कि गलत मार्ग से रोकना और उचित मार्ग की तरफ बढ़ाना ही मित्रता का श्रेष्ठ एवं स्वाभाविक गुण भी है। विरोध करने वाला शत्रु नहीं अपितु गलत कार्यों का विरोध न करने वाला परम शत्रु होता है। उन्होंने कहा कि दुर्योधन ने चाचा विदुर की बात मान ली होती तो महाभारत नहीं होती और रावण ने भाई विभीषण की बात मानी होती तो लंका विध्वंश नहीं होती। वास्तव में सच्चा मित्र वही है जो हमारी मति सुधार दे। जीवन को श्रेष्ठ गति देते हुए गोविंद के चरणों में गति प्रदान कर दे। संवाद