जींद। आर्थिक तौर पर जींद जिला भले ही प्रदेश में पिछड़ा हो लेकिन सामाजिक तौर पर लिंगानुपात में अंतर को घटाकर यहां के लोगों ने अपनी जागरूकता का परिचय दिया है। बेटियों के जन्म लेने के मामले में जींद प्रदेश में फतेहाबाद के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है। लिंगानुपात में अंतर घटाने की दिशा में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग का प्रयास रहा। वहीं खाप पंचायतों का भी भरपूर सहयोग मिला है।
नवंबर में जारी रिपोर्ट के अनुसार फतेहाबाद एक हजार पर 958 लड़कियों के साथ प्रदेश में पहले तथा जींद 944 के साथ दूसरे नंबर पर है। चरखी दादरी भी 944 के आंकड़े के अनुसार दूसरे स्थान पर रहा है। औद्योगिक रूप से विकसित रेवाड़ी 882 बेटियों के साथ सबसे अंतिम नंबर पर आता है। वर्ष 2022 में लिंगानुपात में जनवरी से अप्रैल तक जींद पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। मई से अक्तूबर तक लगातार दूसरे स्थान पर बना रहा और नवंबर में भी जींद अपना दूसरा स्थान बनाए रखने में कामयाब रहा है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह उपलब्धि साफ करती है कि खाप पंचायतें बेटी विरोधी नहीं हैं।
जींद की माजरा खाप पंचायत, कंडेला खाप, नौगामा खाप, बिनैण खाप, सिहाग खाप, पूनिया खाप से लेकर दूसरी खापों ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को अपनी तरफ से खूब सपोर्ट किया है। यह जींद की धरती ही है, जिस पर पहली महिला खाप पंचायत बीबीपुर गांव में की थी। बीबीपुर गांव में ही लाडो के नाम पर तालाब का नाम रखा गया और बेटियों के नाम की नेम प्लेट घरों के दरवाजों पर लगाई। सेल्फी विद डॉटर अभियान भी जींद के बीबीपुर गांव से शुरू हुआ जिसकी तारीफ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मौकों पर कर चुके हैं। विदेशी मीडिया ने भी जींद के बीबीपुर गांव से बेटियों और महिलाओं को मिले इस सम्मान की खूब तारीफ की है। पूरे प्रदेश का औसतन लिंगानुपात 915 है। इस वर्ष प्रदेश में 476926 बच्चों ने जन्म लिया है। इनमें से 227848 लड़कियां तथा 249078 लड़के पैदा हुए हैं। संवाद
जिला लिंगानुपात
फतेहाबाद 958
जींद 944
चरखी दादरी 944
रोहतक 930
पंचकूला 929
नूंह 929
अंबाला 927
पलवल 926
सिरसा 925
गुरुग्राम 923
यमुनानगर 922
पानीपत 922
भिवानी 918
कैथल 910
महेंद्रगढ़ 904
हिसार 904
करनाल 896
कुरुक्षेत्र 891
सोनीपत 891
फरीदाबाद 890
झज्जर 886
रेवाड़ी 882
(औसतन हरियाणा में 1000 पर 915 लड़कियां)
जिले में लिंगानुपात पहले की अपेक्षा काफी सुधरा है। इसमें जिला प्रशासन, खाप पंचायतों के साथ लोगों का भी पूरा सहयोग मिला है। लोगों को बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं समझने के लिए जागरूक किया जाता है। बेटियां अच्छे मुकाम हासिल कर रही हैं। लोगों की सोच भी पहले की अपेक्षा बदली है। समय-समय पर पीएनडीटी एक्ट के तहत प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।-डॉ. पालेराम कटारिया, डिप्टी सिविल सर्जन, पीएनडीटी
जींद का लिंगानुपात
2015 - 857
2016 - 900
2017 - 898
2018 - 927
2019 - 938
2020 - 904
2021 - 923
पिछले वर्ष पहले नंबर पर रोहतक, दूसरे पर पंचकूला, तीसरे पर सिरसा, चौथे पर नूंह, पांचवें पर हिसार तथा छठा स्थान जींद का था। सोनीपत, झज्जर तथा फतेहाबाद लिंगानुपात में सबसे पीछे थे, इनका लिंगानुपात 900 से भी कम था।