जींद। वर्कशॉप में 15 दिन पहले दस नई रोडवेज बसें आ चुकी हैं लेकिन अभी तक ये रुटों नहीं दौड़ पाई है। दरअसल अभी तक इन बसों का न तो बीमा हुआ है और न ही पासिंग का काम। रोडवेज प्रबंधन ने नई बसों का बीमा करवाने के लिए राशि ट्रेजरी कार्यालय में जमा करा रखी है लेकिन वहां पर ये बिल अटके हैं। यह भी तय नहीं कि इस काम में कितना दिन लग जाएगा। ऐसे में नई बसें वर्कशॉप में खड़ी हैं और यात्री सड़कों पर हैं।
दरअसल जिले के कई लंबे मार्ग काफी समय से बसों के अभाव में बंद हैं। रोडवेज विभाग ने काफी प्रयास के बाद बसों की स्वीकृति कराई। जींद डिपो को 85 बसें मिलनी है। न दस बसों पर एक करोड़ 22 लाख 50 हजार रुपये लागत आई है। 19 फरवरी को गुरुग्राम से दस नई बसें रोडवेज डिपो में पहुंची थी लेकिन वर्कशॉप में खड़ी इन बसों पर धूल जमा हो रही है।
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बंद पड़े इन रूटों पर चलनी हैं बसें
नई बसों के आने पर रोडवेज ने योजना बनाई थी कि इन बसों को लंबे और बंद पड़े रूटों पर उतारा जाए, जिससे बंद पड़े रूट ऋषिकेश, हरिद्वार, पलवल, मथुरा, श्रीगंगानगर, पटियाला और खाटूश्याम के लिए चलाया जाए, क्योंकि यह रूट बसों की कमी के कारण ही बंद किए गए थे। इसके अलावा सालासर, लुधियाना, चंडीगढ़ और रूटों पर भी इन्हीं नई बसों का संचालन किया जाए जबकि इन रूटों पर जो बसें चल रही है, उनको लोकल रूटों पर चलाया जाए, लेकिन नई बसों का बीमा और पासिंग नहीं होने से रोडवेज की बनाई हुई योजना धरी की धरी रह गई।
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किलोमीटर बसों के सहारे चल रहा है काम
जींद डिपो में इस समय 140 बस मार्ग हैं, जिसमें किलोमीटर स्कीम की 35 बस शामिल हैं। किलोमीटर स्कीम वाली बसों के सहारे ही डिपो चल रहा था, क्योंकि रोडवेज की अधिकतर कंडम हो चुकी है, जिनको लंबे की बजाय लोकल रूटों पर भेजा जा रहा था। जींद डिपो की बसों में हर रोज 16 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं। जनसंख्या के हिसाब से जींद में बसों की संख्या 200 से ज्यादा होनी चाहिए। बसों की कमी के चलते ग्रामीण व लोकल रूट पर बसों का संचालन बाधित है। जींद से रोहतक, भिवानी और कुरुक्षेत्र रूट पर दोपहर के बाद बसों को लेकर यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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नई दस बसों का बीमा करवाने के लिए ट्रेजरी कार्यालय में एक सप्ताह पहले ही बिल जमा करवाए हुए हैं। अभी तक बिल पास नहीं हुए हैं। जैसे ही बिल पास होंगे, उसके बाद बसों के बीमे और पासिंग प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और उसके बाद बसों को रूटों पर उतारा जाएगा।
-विरेंद्रपाल स्वामी, संस्थान प्रबंधक, जींद डिपो।