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नारद संचार सिद्धांत प्रभावी पत्रकारिता का दर्शनशास्त्र है: डॉ. बलराम

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21जेएनडी05-राजकीय महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते डॉ. बालराम। स्रोत संस्थान
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जींद। राजकीय महाविद्यालय में दर्शनशास्त्र विभाग और जनसंचार विभाग के संयुक्त तत्वावधान में वीरवार को विश्व दर्शन दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया। इसकी अध्यक्षता प्राचार्य सत्यवान मलिक ने की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष नवंबर के तीसरे वीरवार को विश्व दर्शन दिवस मनाकर यूनेस्को, मानव विचार के विकास, प्रत्येक संस्कृति और प्रत्येक व्यक्ति के लिए दर्शन के स्थायी मूल्य को रेखांकित करता है। दर्शनशास्त्र एक प्रेरणादायक अनुशासन है और साथ ही एक ऐसा दैनिक अभ्यास भी है जो समाज को बदल सकता है। इस दौरान सीआरएसयू के सहायक प्रो. डॉ. बालराम ने कहा कि सुकरात दर्शनशास्त्र के जनक हैं। सत्य और ज्ञान की उनकी खोज उनके समय में बहुत प्रभावशाली थी और आज भी है। नारद के संचार के सिद्धांतों में प्रभावी पत्रकारिता के लिए आवश्यक तीन प्रमुख विशेषताएं समाहित थी। समयबद्धता, सत्यनिष्ठा और परिणामोन्मुखी होना। ये सभी सभी प्राणियों के हितों की सेवा करने के व्यापक लक्ष्य के साथ संचालित किए गए थे। नारद के भक्ति सूत्रों में उनके परमात्मा व भक्त के संबंधों की व्याख्या से वे एक दार्शनिक के रूप में सामने आते हैं। पत्रकारिता का अस्तित्व श्लोक कल्याण के भाव पर ही टिका है। मिशन से प्रोफेशन में तब्दील हो चुकी पत्रकारिता में इसी भाव की कमी आती जा रही है। यह इसलिए हो रहा है क्योंकि पत्रकारिता में दर्शन का अभाव है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. विजयपाल ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से छात्रों में अपने विषय के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न होती है और वह अधिक रुचि के साथ अध्ययन कार्य में लग जाते हैं। इस दौरान प्रो. विक्रम सिंह, प्रो. मनोज कुमार, प्रो. शिवकुमार, प्रो. राहुल, प्रो. अंकित, प्रो. नरेंद्र दुग्गल मौजूद रहे।
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