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Jind: राजकीय सम्मान के साथ दी गई नायब सूबेदार को अंतिम विदाई, जोधपुर में तैनात थे सर्वजीत पाल सिंह

Fri, 23 Dec 2022 10:49 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सफीदों, जींद (हरियाणा)

सार

सेना की टुकड़ी ने शस्त्र झुकाकर व मातमी धुन बजाकर अंतिम विदाई दी। वहीं प्रशासन व सरकार का कोई नुमाइंदा नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी दिखी।
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साथी को सलामी देती हुई सेना की टुकड़ी। विलाप करती हुई पत्नी को संभालते हुए परिजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हरियाणा के जींद में उपमंडल सफीदों के गांव छाप्पर निवासी सिख रेजिमेंट के नायब सूबेदार को राजकीय सम्मान के साथ शुक्रवार को अंतिम विदाई दी गई। नायब सूबेदार सर्वजीत पाल सिंह (44) राजस्थान के जोधपुर में तैनात थे, जहां ड्यूटी के दौरान स्वास्थ्य खराब होने से शहीद हो गए थे।

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उनका तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा तो समूचे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी तादाद में लोग उनके आवास पर पहुंचे और अंतिम दर्शन कर शोक जताया। सेना की एक टुकड़ी ने राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी।
 
सूबेदार गुरजीत सिंह के नेतृत्व में आई सेना की टुकड़ी ने शस्त्र झुकाकर व मातमी धुन बजाकर अपने साथी को अंतिम विदाई दी। वहीं परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। अंतिम दर्शन के दौरान शहीद सर्वजीत पाल सिंह की पत्नी हरजीत कौर अपने पति गले लगकर रो रही थी।
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ऐसा ही कुछ हाल शहीद की मां जसविंद्र कौर व दोनों बेटों चरणजीत सिंह व गुरकीत सिंह का भी था। संस्कार के वक्त माहौल बेहद गमगीन था। बता दें कि सर्वजीत पाल सिंह वर्ष 1999 में सिख रेजीमेंट में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। जैसलमेर राजस्थान में ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत खराब हो गई।

उनको सैनिक अस्पताल जैसलमेर में ले जाया गया जहां पर उन्होंने अंतिम सांस ली। नायब सूबेदार सर्वजीतपाल सिंह परिवार में अपने पीछे दो पुत्र चरणजीत सिंह (19), छोटे गुरकीत सिंह (12), पत्नी हरजीत कौर (40), माता जसविंद्र कौर (70), दो भाईयों जसपाल सिंह व जितेंद्रपाल सिंह को छोड़ कर गए हैं। 

न कोई अधिकारी पहुंचा न राजनेता 
नायब सूबेदार सर्वजीत पाल सिंह के शहीद होने की जानकारी वीरवार की शाम ही हो गई थी। इसके बाद भी अंतिम संस्कार में शामिल होने या परिवार को ढांढस बंधाने कोई प्रशासनिक अधिकारी या राजनेता नहीं पहुंचा। प्रशासन की ओर से कोई बंदोबस्त भी नहीं किया गया था। केवल सेना की विशेष टुकड़ी ने ही अपने दिवंगत साथी को पूरे सम्मान के साथ विदाई दी। इसको लेकर ग्रामीणों में भारी रोष देखने को मिला। ग्रामीणों का कहना था कि प्रशासनिक अधिकारी व नेतागण अंतिम संस्कार के वक्त जरूर पहुंचेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए तथा शहीद के बड़े बेटे को सेना में नौकरी दी जाए। 

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