16जेएनडी10 : कन्याओं को भोजन करवाने के बाद उनकी पूजा करके उपहार देते श्रद्धालु। संवाद
जींद। चैत्र नवरात्र की अष्टमी पर मंगलवार सुबह श्रद्धालुओं ने कन्याओं को भोजन करवाने के बाद व्रत खोला। घर में कन्या पूजन के लिए श्रद्धालुओं को गली-गली घूमते देखा गया। कन्याओं को एकत्रित करने के लिए श्रद्धालुओं को काफी मशक्कत करनी पड़ी। एक-एक बच्ची को तीन-चार घरों में भोजन करना पड़ा। वहीं विभिन्न मंदिरों में कन्याओं के लिए सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। मान्यता है कि नवरात्र की अष्टमी पर कन्या को भोजन करवाने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मन्नत पूरी करती हैं। यह भी मान्यता है कि जब तक कन्या को भोजन न कराया जाए तब तक व्रत सफल नहीं होता है।
वहीं उचाना में दुर्गा अष्टमी पर घरों में श्रद्धालुओं ने माता की पूजा-अर्चना की। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं ने हलवा, पूरी का प्रसाद बनाकर कंजकों को खिलाया। सुबह ही घरों में कंजकों को भोजन करवाने के लिए महिलाएं एक-दूसरे घर के बाहर खड़े होकर कंजकों का इंतजार कर रही थीं। दुर्गा अष्टमी होने के चलते स्कूलों का समय भी सुबह 10 बजे से 2 बजे तक किया गया था।
पं. अशोक शर्मा ने कहा कि नवरात्र में माता की पूजा-अर्चना करने वालों, व्रत रखने वालों को विशेष फल मिलता है। नवरात्र में बेटियों की पूजा की जाती है। माता के नौ रूपों की पूजा की जाती है। बेटियों को सम्मान देना चाहिए। बेटियों से ही समाज में रिश्ते-नाते हैं। धन के लिए मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। शिव के साथ माता पार्वती, भगवान कृष्ण के साथ राधा, राम के साथ सीता की पूजा करते हैं। बेटियों की जन्मदर कम होने के चलते आज दुर्गा अष्टमी पर कंजकों को भोजन करवाने के लिए श्रद्धालुओं को इंतजार करना पड़ा।
16जेएनडी10 : कन्याओं को भोजन करवाने के बाद उनकी पूजा करके उपहार देते श्रद्धालु। संवाद