बाल मनोवैज्ञानिक बोले-अत्यधिक प्रयोग के कारण तनाव के शिकार हो रहे बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। डीएवी पुलिस पब्लिक स्कूल में छात्रों के लिए नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत पर बाल मनोवैज्ञानिक नरेश जागलान के मार्गदर्शन में काउंसिलिंग सेशन का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य रूप से छात्रों को मोबाइल के दुष्प्रभाव से अवगत कराते हुए मोबाइल फोन का कब और कितना प्रयोग करना चाहिए, उसके बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज आदमी हंसता कम है और फोन ज्यादा देखता है। फोन व्यक्ति के जीवन में डाकू की तरह काम करता है। मोबाइल फोन की लत, नशे से भी खतरनाक है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चे फोन के अत्यधिक प्रयोग के कारण तनाव के शिकार हो रहे हैं। फोन को आंखें नहीं, कान दो, फोन बुरा नहीं है, परंतु उसको प्रयोग में लाने का ढंग गलत है। उन्होंने बच्चों को फोन की जगह किताबें हाथ में रखने के लिए प्रेरित किया। इस विशेष दिवस पर डीएवी वैदिक परंपरा के अनुसार नवीन शास्त्री व संस्कृत अध्यापिका संजू आर्या के मार्गदर्शन में शिक्षक व विद्यार्थियों की ओर से हवन में आहुति डाली गई। प्रधानाचार्य राजेश कुमार ने अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि अध्यापक द्वारा सिखाई गई प्रत्येक गतिविधि बच्चों को जीवन की विभिन्न चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए एक ईमानदार प्रयास है।