जींद। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन ने पिछले छह माह का वेतन दिलाए जाने की मांग को लेकर मंगलवार को शहर में प्रदर्शन किया और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी बलजीत पूनिया को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपने से पहले मिड डे मील वर्कर्स ने नेहरू पार्क में रोष सभा की। जिला प्रधान कैलाशो ने कहा कि वर्कर्स को पिछले छह माह से वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा वर्कर्स की छंटनी भी की जा रही है। वर्करों को निशुल्क मेडिकल की कोई सुविधा नहीं है। उन्होंने चेताया कि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 28 अप्रैल तक को सभी मिड डे मील वर्कर्स स्कूलों में राशन नहीं बनाएंगे और वह हड़ताल करके प्रदर्शन करेंगी। प्रदेश में पिछले छह महीने से मिड-डे मील वर्करों को मानदेय व वेतन न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। उन्होंने मांग की कि मिड डे मील वर्कर्स का बकाया मानदेय तुरंत जारी करवाया जाए। मिड डे मील वर्कर्स का बढ़ाया गया मानदेय प्रत्येक महीने की सात तारीख तक मिल जाए। मानदेय मिड डे मील वर्कर्स के खाते में डाला जाए। मानदेय 12 महीने मिले। मिड डे मील वर्कर्स की बेगार बंद हो। बच्चों के खाना खाने के बाद किसी भी मिड डे मील वर्कर्स को कुक के साथ स्कूल में रहने का कोई दबाव न बनाया जाए। स्कूलों को मर्ज करना और उन्हें बंद करने का कदम वापस लिया जाए, जिन वर्कर्स को हटाया जा रहा है। उन्हें काम पर वापस लिया जाए या फिर उन्हें अन्य स्कूलों में जरूरत के अनुसार समायोजित किया जाए। मिड-डे मिल वर्कर्स की रिटायरमेंट उम्र 65 साल की जाए व दो लाख रुपये रिटायरमेंट लाभ मिले। वर्दी भत्ता कम से कम दो हजार रुपये सालाना किया जाए। सभी मिड-डे मील कुक को ईएसआई व पीएफ में कवर किया जाए। वर्कर्स का मेडिकल निशुल्क हो। मिड-डे मील वर्करों को पक्का कर्मचारी बनाया जाए और न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये हो। यदि मिड डे मील वर्करों का बकाया मानदेय जारी नहीं किया गया तो 28 अप्रैल को सभी मिड-डे मील वर्कर स्कूलों में राशन नहीं बनाएंगी।