लघु सचिवालय में खुलेआम घूम रहा वायरस से ग्रस्त पशु। संवाद।
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जींद। गोवंश में लंपी वायरस का प्रकोप जिले में लगातार बढ़ रहा है। जिसके चलते अब तक 1775 गोवंश लंपी चर्म रोग वायरस की चपेट में आ चुका है। इसके कारण चार पशुओं की मौत भी हो चुकी है, जबकि 739 गोवंश इस बीमारी को रिकवर कर चुके हैं। जिले में अब तक करीब 80000 पशुओं का टीकाकरण हो चुका है।
गोपुत्र सेना के सदस्यों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में मौत के आंकड़े कम दिखाए जा रहे हैं। इस बीमारी से काफी गोवंश की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा मौत बेसहारा गोवंश की हुई है। सोमवार को लंपी वायरस से संक्रमित सात गोवंश के मृत होने पर गड्डा खोदकर उन्होंने दबाए हैं। पिछले तीन दिन में 15 से ज्यादा मृत गोवंश को वह गड्ढे खोद कर दबा चुके हैं। नगर परिषद की तरफ से भी सोमवार को संक्रमित एक मृत गाय को दबाया गया है। बड़ी संख्या में शहर में संक्रमित बेसहारा गोवंश घूम रहा है, जो उपचार के अभाव में तड़प रहा है और शरीर पर बनी गांठ के फूटने से खून बह रहा है।
गोपुत्र सेना के सदस्य मनोज कुमार ने बताया कि लंपी वायरस बीमारी आने के कारण गोवंश चारा खाना और पानी पीना छोड़ देते हैं। जिससे उनकी मौत हो रही है। गोभक्तों ने अपने स्तर पर देसी दवाई तैयार की है। जो संक्रमित गोवंश के शरीर पर बनी गांठ व घाव पर लगा रहे हैं। वहीं दूसरे गो संगठनों से जुड़े लोग भी इस काम में मदद के लिए आगे आए हैं। देसी दवाई तैयार करने और मार्केट से दवाइयां खरीदने के लिए पैसे एकत्रित कर रहे हैं।
गोशाला और नंदीशाला में बेसहारा गोवंश छोड़ रहे किसान
गांवों से किसान बेसहारा गोवंश को नंदीशाला और गोशालाओं में छोड़ रहे हैं। गोशाला व नंदीशाला संचालकों की तरफ लंपी वायरस बीमारी के चलते बाहर से बेसहारा गोवंश लेने से इंकार किया जा रहा है। उसके बावजूद किसान जबरदस्ती गोवंश छोड़ रहे हैं। नंदीशाला संचालन समिति के सचिव जयभगवान नंबरदार ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि बाहर से संक्रमित गोवंश आने से नंदीशाला में यह बीमारी फैल सकती है। इसलिए किसान अभी बेसहारा गोवंश नंदीशाला में न लाएं, ताकि इसके संक्रमण को रोका जा सके।
जिले में लंपी वायरस से पशुओं को बचाने के लिए लगातार वैक्सीनेशन का काम चल रहा है, ताकि इस बीमारी को पशुओं में बढ़ने से रोका जा सके। अब इसमें सुधार की उम्मीद ज्यादा है। संक्रमण से ज्यादा रिकवरी दर बढ़ रही है।
-डॉ. राजसिंह बैनीवाल एसडीओ पशुपालन विभाग जींद।