संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। 2023 का आखिरी चंद्रग्रहण शनिवार को लगने जा रहा है। वैसे तो चंद्र ग्रहण शरद पूर्णिमा (शनिवार) की रात को 11:30 पर बजे शुरू होगा और 29 अक्टूबर को सुबह 2:24 पर खत्म होगा। ग्रहण की कुल अवधि एक घंटा 16 मिनट रहेगी। चंद्रग्रहण का सूतक काल शनिवार दोपहर दो बजकर 52 मिनट से शुरू हो जाएगा, जबकि समापन और रात्रि को दो बजकर 22 मिनट पर खत्म होगा। इस ग्रहण के दौरान विशेषकर गर्भवती महिलाओं को काफी सावधानी बरतनी होगी। इसके अलावा चंद्र ग्रहण के दौरान शुभ कार्य भी वर्जित रहेंगे। कर्क, मिथुन, वृश्चिक, धनु एवं कुंभ राशि वाले जातकों के लिए यह ग्रहण शुभ फल देने वाला है। सिंह, तुला व मीन राशि के लिए मध्यम फल व मेष, वृष, कन्या व मकर राशि वालों के लिए ग्रहण अशुभ फल देगा।
शरद पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण के चलते नहीं खा सकेंगे खीर
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि शरद पूर्णिमा 28 अक्टूबर को सुबह 4:17 पर शुरू होगी जो देर रात 3:53 तक रहेगी। वहीं 28 अक्टूबर को ही चंद्र ग्रहण की शुरूआत होगी। ऐसे में शरद पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु खीर का भोग नहीं लगा पाएंगे। ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्र से अमृत की वर्षा होती है। इसलिए चांद की रोशनी में खीर रखी जाती है। इस बार चंद्र ग्रहण के चलते ऐसा नहीं हो पाएगा।
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चंद्रग्रहण में यह काम नहीं करनी चाहिए
1. चंद्रग्रहण के दौरान खाने से परहेज करना चाहिए।
2. ग्रहण के कारण रखा हुआ भोजन विष के समान हो जाता है। जिसे ग्रहण करने पर स्वास्थ्य संबंधी कई दिक्कतें हो जाती हैं।
3. जो महिलाएं गर्भवती हैं, उन्हें ग्रहण के दौरान भूल कर भी बाहर नहीं निकलना चाहिए।
4. ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को सोना नहीं चाहिए।
5. चंद्र ग्रहण के दौरान मंदिर के कपाट बंद रखें। पूजा-पाठ की चीजों को स्पर्श नहीं करें।
6. ग्रहण के दौरान मांसाहारी खाना खाने व शराब के सेवन से परहेज करना चाहिए।
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चंद्र ग्रहण समाप्त होने पर यह करें
1. चंद्र ग्रहण खत्म होने पर मुख्य रूप से गर्भवती महिला को पवित्र जल से स्नान करना चाहिए। जिससे ग्रहण का दोष खत्म हो जाता है।
2. आमजन को भी ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना चाहिए।
3. ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगा जल का छिड़काव करें। घर में पूजा स्थल पर विशेष रूप से गंगा जल का छिड़काव किया जाए।
4. ग्रहण के बुरे प्रभावों से बचने के लिए गाय को रोटी खिलानी चाहिए। ग्रहण समाप्त होने पर कुछ दान अवश्य करें।
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इन बातों का रखें ध्यान
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण एक अशुभ खगोलीय घटना मानी जाती है। इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव ज्यादा होता है, ऐसे में गर्भवती महिलाओं को न तो चंद्रग्रहण देखना चाहिए और न ही घर से बाहर निकलना चाहिए। ग्रहण काल में अपने आराध्य देवी-देवता के मंत्र का मन ही मन में जाप करना चाहिए। इसके अलावा भूलकर भी सुई, चाकू, कैंची जैसी धारदार चीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ग्रहण के बाद हर व्यक्ति को स्नान करना लाभदायक होता है।