जींद। रोडवेज और प्राइवेट बसों में चालक बार-बार प्रेशर हॉर्न बजाकर शहर के अंदर भीड़-भाड़ इलाकों में दहशत जैसा माहौल पैदा कर रहे हैं। यह हालात नए नहीं है बल्कि छह महीने से बने हुए हैं, लेकिन यातायात पुलिस ने बस चालकों पर अंकुश नहीं लगाया है और न ही उन पर कोई कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में बसों के प्रेशर हॉर्न से आमजन परेशान है। सबसे ज्यादा असर दिल के मरीजों, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है। हालांकि यातायात पुलिस शहर के हर चौक-चौराहे पर चालान करने के लिए मुस्तैद रहती है, लेकिन पुलिस का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार पिछले दस दिनों में 1524 चालान किए हैं। पुलिस का केवल बाइक, सीट बेल्ट, नाबालिग चालक, अधूरे कागजात के चालान करने पर ही ज्यादा ध्यान रहता है जबकि बस या भारी वाहन के प्रेशर हॉर्न का एक भी चालान नहीं किया है। यातायात पुलिस को चाहिए कि शहरवासियों को ध्वनि प्रदूषण से बचाने के लिए प्रेशर हॉर्न बजाने वाले बस चालकों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
गोहाना रोड से हर 5 मिनट में गुजरती है बस
शहर का गोहाना रोड सबसे व्यस्त रोड है। इस रोड पर दिन-रात वाहनों का दबाव रहता है। नए बस अड्डे से अधिकतर रोडवेज और प्राइवेट बसें गोहाना रोड से ही गुजरती हैं। गोहाना रोड पर ही एसपी आवास, जेल, लघु सचिवालय, नागरिक अस्पताल, दो राजकीय महाविद्यालय, रेडक्रॉस, नगर परिषद कार्यालय है, जहां पर सुबह से लोगों का आवागमन शुरू हो जाता है। यहां से जितनी भी बसें गुजरती हैं, उन पर प्रेशर हॉर्न लगे हुए हैं। हालांकि यह क्षेत्र पूरी भीड़-भाड़ वाला इलाका है, जहां लोगों के साथ-साथ ऑटो, ई-रिक्शा, कार और अन्य वाहनों का जमावड़ा रहता है, लेकिन बस चालक लोगों की परवाह किए बिना यहां लगातार प्रेशर हॉर्न का प्रयोग करते हैं।
किस दिन-कितने चालान किए गए
तिथि चालान
11 अप्रैल
244
12 अप्रैल
49
13 अप्रैल
135
14 अप्रैल
346
15 अप्रैल
106
16 अप्रैल
119
17 अप्रैल
106
18 अप्रैल
225
19 अप्रैल
104
20 अप्रैल
90
बसों से प्रेशर हॉर्न हटवाए प्रशासन
शहरवासी अतुल चौहान, रमेश, राजेंद्र मिस्त्री, रामनिवास, सुखजीत का कहना है कि शहर के बीच से गुजरने वाली निजी और रोडवेज बसों के चालक अंधाधुंध प्रेशर हॉर्न का प्रयोग करते हैं। इसका असर संपर्क में आने वाले लोगों में होता है। दिल के मरीजों, बच्चों और बुजुर्ग के बीच तो दहशत जैसा माहोल बन जाता है जबकि भीड़-भाड़ वाले इलाके में प्रेशर हॉर्न बजाने का प्रावधान नहीं है। बसों में प्रेशर हॉर्न बजाने वाले चालकों के खिलाफ पुलिस प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि ध्वनि प्रदूषण भी न हो और लोगों में दहशत भी न बनें।
मामले को लेकर आरटीए नहीं गंभीर
निजी बसों के प्रेशर हॉर्न के प्रयोग के चलते क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) गंभीर नहीं है। आरटीए को जब इस बारे बात की गई तो उन्होंने मामले की गंभीरता को न समझते हुए कुछ भी बोलने से साफ मना कर दिया। हालांकि निजी बसों की जिम्मेदारी आरटीए की है। ऐसे में आरटीए के इस रवैये से उनकी अपनी जिम्मेदारी में लापरवाही साफ दिखाई दे रही है।
रोडवेज बसों पर प्रेशर हॉर्न जरूर लगे हैं, लेकिन रिहायशी क्षेत्र में प्रेशर हॉर्न बजाने की अनुमति नहीं है। इसलिए चालकों को सामान्य हॉर्न का ही प्रयोग करना चाहिए। इसको लेकर वह रोडवेज चालकों को निर्देश देंगे।
दीपक कुंडू, महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो जींद
शहर से गुजरने वाली तमाम बसों के चालकों द्वारा बजाए जा रहे प्रेशर हॉर्न पर रोक लगाई जाएगी। इसको लेकर निजी बसों पर कार्रवाई के लिए आरटीए को निर्देश जारी किए जाएंगे। यदि फिर भी चालक मनमानी से बाज नहीं आए तो उनके चालान किए जाएंगे।
-डॉ. मनोज, उपायुक्त।