अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति 14 मार्च को प्रदेश भर में आरक्षण की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पर धरना देगी। धरना देकर सरकार 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया जाएगा। इस दौरान यदि सरकार जाटों के आरक्षण के लिए कुछ नहीं करती तो जाट नेता अपने-अपने स्थानों पर आंदोलन शुरू कर देंगे।
समिति के जिलाध्यक्ष कैप्टन रणधीर सिंह चहल ने कहा कि आंदोलन के दौरान किसी भी जाट नेता ने हिंसा व लूट का समर्थन नहीं किया। न ही कोई जाट नेता इसमें शामिल हुआ।
कैप्टन चहल के अनुसार समिति 14 मार्च को दोपहर 11 से एक बजे तक धरना दिया जाएगा। इसके बाद प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा। कैप्टन चहल ने मांग की कि जिन लोगों ने जातीय जहर फैलाकर हिंसा कराई, उनके खिलाफ देशद्रोह के केस दर्ज हों और निर्दोष लोगों की गिरफ्तारी पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए। चहल के अनुसार इस बार देश के सभी उन 13 राज्यों में जाट आरक्षण का आंदोलन होगा, जहां जाट हैं।
सरकार को सुझाया रोड मैप
पत्रकार वार्ता में समिति के जिलाध्यक्ष ने सरकार को आरक्षण का रोड मैप भी सुझाया। कैप्टन चहल ने कहा कि फिलहाल ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। इसमें बीसी ए में 71 जातियां और बीसी बी में पांच जातियां हैं। अभी आरक्षण में तीन प्रतिशत बढ़ाने की गुंजाइश है। तीन प्रतिशत बढ़ाकर जाटों को ओबीसी में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ईबीसी आधार पर आरक्षण देती है तो यह जाटों को स्वीकारय नहीं होगा।