26जेएनडी25: कार्यक्रम में प्रस्तुत देते हुए प्रतिभागी। संवाद
उचाना। शहर की पुरानी मंडी स्थिति तेरापंथ भवन में साध्वी तिलकश्री ठाणे-3 के सानिध्य में निरंतर धर्मसभा आयोजित हो रही है। तेरापंथ के 9वें आचार्य तुलसी के 28वें महाप्रयाण दिवस साध्वी तिलकश्री के सानिध्य में मनाया गया। आचार्य तुलसी के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालने के उनकी शिक्षाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।
साध्वी महिमाश्री ने कहा हम सूरज की कद्र उसकी ऊंचाई के कारण नहीं करते बल्कि उसकी उपयोगिता के कारण करते है। व्यक्ति नहीं बल्कि व्यक्तित्व आदरणीय होता है। इसलिए अपना व्यक्तित्व बनाए ताकि आपकी हर कोई कद्र करें। हमेशा वो रहिए जो हम असल में है और वो कहिए जो हम सच में महसूस करते है, क्योंकि जो लोग बुरा मानते है वो मायने नहीं रखते और जो लेग मायने रखते है वो बुरा नहीं मानते। माता-पिता वो हस्ती हैं जिसके पसीने की एक बूंद का कर्ज भी औलात ताउम्र नहीं चुका सकती है। इसलिए मात-पिता का दिल कभी नहीं दुखाना चाहिए।
साध्वी ने कहा कि जिंदगी में विश्वास क्वांटिटी बल्कि क्वालिटी में रखिए। जीवन में वो ही आपके सबसे बड़े वफादार होते है जो रिश्ते पीठ पीछे वफादार है वहीं रिश्ते आईने की तरह आर-पार है। जब विचार, प्रार्थना और इरादा पॉजिटिव हो तो जिंदगी अपने आप पॉजिटिव हो जाती है। जीवन में सबका प्रिय बने रहने की कोशिश अच्छे-खासे व्यक्तित्व को भी साधारण बनाकर छोड़ती है। जीवन में सबकी नजरों में नेक, अच्छे आप नहीं हो सकते क्योंकि सबके चश्में का नंबर एक नहीं हो सकता है। जीवन में परखने वाले के साथ नहीं बल्कि समझने वाले के साथ रहना चाहिए। जीवन में कामयाब लोग अपने फैसले से दुनिया बदल देते है जबकि नाकामयाब लोग दुनिया के डर से अपने फैसले बदल लेते है। इसलिए ऐसे कामयाब बने जहां आप खुद के फैसले से दुनिया को बदल सको।