22जेएनडी05: पुजारी आचार्य सत्यनारायण शांडिल्य। संवाद
उचाना। शहर के प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर पुजारी आचार्य सत्यनारायण शांडिल्य ने प्रवचन में कहा कि शांति बनाए रखने के लिए सत्य को ही छोड़ देना, यह उचित नहीं है। आवश्यक नहीं कि जीवन में सत्य और शांति एक ही साथ प्राप्त हो। यदि परिस्थिति ऐसी बन जाए जब शांति और सत्य में से किसी एक को चुनना पड़े तो नि:संकोच सत्य को चुन लेना ही श्रेष्ठ है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण चाहते तो अपनी शांति के लिए कभी भी असत्य का विरोध न करते।
उन्होंने कहा कि हमारे महापुरुषों ने केवल और केवल इसलिए अशांति एवं कष्टों से भरे जीवन के दुर्गम मार्ग को स्वीकार किया ताकि सत्य का वरण और रक्षण किया जा सके। यद्यपि जीवन का लक्ष्य शान्ति प्राप्ति ही है पर वो शांति, जिसकी प्राप्ति सत्य के द्वारा होती है। अत: सत्य के लिए शांति छोड़ी जा सकती है पर शांति के लिए सत्य कदापि नहीं। कब, कहां और कैसे सत्य का चुनाव करना है स्वयं विवेक से चिन्तन करें एवं निर्णय लें।