14जेएनडी04: महर्षि दयानंद योग चिकित्सा आश्रम में प्रवचन करते हुए आचार्य रामवेश। संवाद
जींद। महर्षि दयानंद योग चिकित्सा आश्रम में रविवार को मासिक वैदिक सत्संग का आयोजन स्वामी रामवेश की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर पंडित सुरेश चंद्र शास्त्री, विद्यासागर शास्त्री व बिमला आर्या ने भी अपने विचार रखे। स्वामी रामवेश ने भारत की ऋतु स्थिति को विचित्र बताया। दुनिया में भारत ही केवल एक ऐसा देश है जहां छह ऋतुएं निर्बाध काम करती हैं। वैज्ञानिक प्रक्रिया के मुताबिक गर्मी, सर्दी आदि छह ऋतुओं का चक्र चलता रहता है। इसके मुताबिक सूर्य दक्षिण की ओर झुक जाता है। उसको दक्षिणायन कहते हैं और जब सूर्य का झुकाव उत्तर की ओर हो जाता है उसे उत्तरायण कहते हैं। इसी के मुताबिक गर्मी, सर्दी आदि बंटवारा सही रूप से होता है। यह खगोलीय वैज्ञानिक व्यवस्था है। उस वैज्ञानिक व्यवस्था का अध्ययन करके खगोल शास्त्र की रचना की गई। ये सारा विधिविधान स्वत: आकाश में घटित होता रहता है। सुरेश चंद्र शास्त्री ने मकर संक्रांति व लोहड़ी का जिक्र करते हुए दुनिया की अटल व निश्चित स्थिति के बारे अवगत कराया। सामाजिक दृष्टि से इन त्योहार को विशेषकर बताया कि लोग हर तरह के गर्म पदार्थों का सेवन अपने शीत निवारण के लिए करते हैं। विद्या सागर शास्त्री ने हवन करवाया और यज्ञ की महिमा के बारे में बताया। बिमला आर्या ने भजनों के माध्यम से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर अश्वनी आर्य, विवेक आर्य, शीला देवी, रघवीर सिंह, रामनिवास फौजी, आनंद आर्य, अनामिका आर्या, पूजा आर्या, गरिमा आर्या मौजूद थी।
14जेएनडी04: महर्षि दयानंद योग चिकित्सा आश्रम में प्रवचन करते हुए आचार्य रामवेश। संवाद