रेलवे ट्रेक क्रॉस करते समय ट्रेन की चपेट में आने और खुदकुशी करने के पिछले दस महीने में 105 मामले हुए हैं। इसमें जिन लोगों की जिंदगी गई है उनमें से केवल 82 लोगों की ही शिनाख्त संभव हुई है। इसके अलावा 23 लोगों की पहचान नहीं होने से अपनों का कंधा तक भी नहीं मिल पाया।
दस माह में 105 लोगों की मृत्यु में 95 पुरुष हैं जबकि दस महिलाएं शामिल हैं। इसमें अधिकतर मामले लोगों की लापरवाही के चलते या फिर मानसिक परेशानी के सामने आए हैं। कुछ लोग एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाते समय सीढ़ियों का प्रयोग नहीं करते और वह ट्रैक से ही दूसरे प्लेटफार्म पर जाने का प्रयास करते हैं। इस दौरान लोग ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा कई बार फाटक जब बंद होती है तो भी दुपहिया वाहन चालक फाटक के नीचे से या साइड में बने कच्चे रास्ते से फाटक को पार करने का प्रयास करते हैं। समय पर फाटक पार नहीं करने पर लोग ट्रेन की चपेट में आने से अपनी जान खो बैठते हैं। वहीं कई लोग मानसिक रूप से परेशान होकर ट्रेन के नीचे आकर आत्महत्या कर लेते हैं।
2020-21 में 144 लोगों की हुई मौत
वर्ष 2022 की तरह ही पिछले दो साल में 140 से ज्यादा लोगों ने ट्रेन के नीचे आकर अपनी जान गंवाई है। 2020 में 55 लोगों की जान गई थी जिसमें से 50 लोगों की शिनाख्त हो गई थी जबकि पांच लोगों को पहचान नहीं हो पाई थी। वहीं वर्ष 2021 में 89 लोगों की जान ट्रेन के नीचे आने से जा चुकी है जिनमें से 68 लोगों की शिनाख्त हो गई थी और 21 लोगों की पहचान नहीं हो पाई थी।
वर्ष 2021 में एक शव की 3 माह बाद हुई थी शिनाख्त
वर्ष 2021 के एक मामले में जीआरपी ने 3 महीने बाद उसके परिजनों को खोजा और फिर परिजनों ने मृतक के कपड़ों से पहचान कर उसकी शिनाख्त की। करीब डेढ़ साल पहले जींद जंक्शन के पास जीआरपी को एक युवक का शव मिला था जिसको शिनाख्त के लिए नागरिक अस्पताल में रखवा दिया था। उसके बाद जीआरपी ने शिनाख्त करने के लिए काफी प्रयास किए लेकिन अज्ञात शव की शिनाख्त नहीं हो पाई। 72 घंटे बीत जाने के बाद शव का अंतिम संस्कार करवा दिया गया। करीब तीन महीने बाद जीआरपी को पता चला कि मरने वाला युवक फरैण कलां गांव का राजेश नामक युवक था जो कि घर से बाहर ही रहता था।
प्लेटफार्म क्रॉस करते समय यात्रियों को सीढ़ियों का प्रयोग करना चाहिए। लापरवाही के चलते लोग कई बार वह अपनी जान गंवा बैठते हैं। कई बार लोग फाटक को वाहन समेत नीचे से क्रास करते समय भी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं तो कई लोग ट्रेन के नीचे आकर आत्महत्या कर लेते हैं। इसके चलते ट्रेन के नीचे आने से जान गंवाने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
-स्नेही राज, प्रभारी, जीआरपी थाना, जींद।