14जेएनडी10-सत्यनारायण शांडिल्य। संवाद
उचाना। प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी पं. सत्यनारायण शांडिल्य ने कहा कि आप अपनी पांचों इंद्रियों का सदुपयोग करें। आप अगर सुखी जीवन जीना चाहता है तो तीन बातें ध्यान रखें। ठीक ढंग से रहना आ जाए, ठीक ढंग से अपनी बात कहना आ जाए, जरूरत पड़ने पर सहना आ जाए। हमें ठीक ढंग से रहना नहीं आता। ढंग से अपनी बात कहनी नहीं आती और सहना भी नहीं आता है। बच्चों को मां-बाप कुछ कहते हैं तो उनको सहन नहीं होता और वे घर छोड़कर चले जाते हैं। मां-बाप जब डांटे तो बच्चे ये सोचें कि मां-बाप नहीं डाटेंगे तो और कौन डाटेंगे। जब बच्चा गलती करें तो बड़े ये सोचे कि बच्चा गलती नहीं करेगा तो और कौन करेगा। गलती चाहे कितनी बार करो, लेकिन एक गलती बार-बार न करो। उन्होंने कहा कि मुस्कराहट दुनिया का सबसे बड़ा इनविटेशन कार्ड है। किसी को अपना बनाना है तो मुस्कुराओ और किसी का बनना है तो मुस्कुराओ। मुस्कराने का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। मुस्कुराता हुए बुड्ढा भी अच्छा लगता है और रोता हुआ बच्चा भी बुरा लगता है।
14जेएनडी10-सत्यनारायण शांडिल्य। संवाद