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Jind News: स्वास्थ्यकर्मियों के बिना कैसे रुकेगा डेंगू

Fri, 03 May 2024 02:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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०2जेएनडी06: मौसमी बीमारियों को लेकर जागरूक करते हुए स्वास्थ्यकर्मी।
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जींद। जिले में अभी तक डेंगू का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन इसकी रोकने करना स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उनके पास एमपीएचडब्ल्यू की कमी है। इनके बिना डेंगू की रोकथाम करना स्वास्थ्य विभाग के लिए तेढ़ी खीर है।
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पिछली बार की बात करें तो डेंगू को लेकर नरवाना हॉट स्पॉट बना हुआ था। यहां हर दिन डेंगू के मामले सामने आए थे। नरवाना की आबादी लगभग 72 हजार है और यहां एमपीएचडब्ल्यू के तीन पद थे, जिन्हें अब समाप्त कर दिया गया है। ऐसे में एमपीएचडब्ल्यू पद बहाली की मांग ने जोर पकड़ लिया है। जिले में कुल 186 सब हेल्थ सेंटर हैं, जबकि यहां पर नियमानुसार 222 होने चाहिए थे। सभी जगह स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है। जींद शहर की आबादी लगभग 216435 है तो नरवाना शहर की आबादी 71917 है।
जींद शहर में स्वास्थ्य सेवा को चलाने के लिए वर्तमान में पीपीसी नागरिक अस्पताल जींद तथा कार्यालय उप सिविल सर्जन जींद के तहत 21 एमपीएचडब्ल्यू व तीन हेल्थ इंस्पेक्टर पुरुष और तीन महिला के नियमित पद स्वीकृत हैं। नरवाना की आबादी 72 हजार होने के बाद भी यहां के तीनों पद समाप्त कर दिए गए हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य सुपरवाइजर का भी एक पद था उसे भी समाप्त कर दिया गया है। इतना ही नहीं चार महिला पद थे उसे भी समाप्त कर दिया गया है। यही कारण है कि यहां पर कभी जींद तो कभी उझाना से कर्मचारियों को बुलाना पड़ता है।
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स्वास्थ्य सुपरवाइजर संघ के प्रदेश अध्यक्ष राममेहर वर्मा ने कहा कि लाखों की आबादी वाले बड़े शहरों तथा एक लाख से कम आबादी वाले जिलास्तरीय छोटे शहरों में एक समान छह एमपीएचडब्ल्यू व एक सुपरवाइजर के पद का नॉर्म निर्धारित कर शेष सभी शहरों में पद समाप्त कर दिए गए हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। हरियाणा की आबादी व नॉर्म के अनुसार प्रदेश में 4024 उप स्वास्थ्य केंद्र, 671 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 164 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अनुरूप केवल 2733 उप स्वास्थ्य केंद्र, 409 प्राथमिक केंद्र तथा 123 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित हैं, जोकि जनता को समुचित स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए कम हैं।

नागरिक अस्पताल में प्लेटलेट्स की सुविधा उपलब्ध

जिन लोगों में खून की कमी होती है उन्हें नागरिक अस्पताल में खून चढ़ाया जाता है। अस्पताल में अब ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन है। वह खून के अंदर सभी कंपोनेंट को अलग-अलग कर देती है। इसके बाद जिस मरीज को जिस कंपोनेंट की जरूरत होगी, उसको वही चढ़ाया जा सकता है। डेंगू के दौरान मरीज में प्लेटलेट्स कम हो जाती है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट मशीन खून से प्लेटलेट्स भी अलग कर देती है। इसके बाद मरीज को प्लेट्लेट्स चढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा जिन मरीजों में खून की कमी होती है, उनको आरबीसी की जरूरत होती है। इसके बाद मरीजों को केवल आरबीसी ही चढ़ाया जा सकता है। इस मशीन से प्लाजमा भी अलग किया जाता है। किसी दूसरे मरीज का प्लाजमा भी दूसरे मरीज को चढ़ाया जा सकता है। पहले इस मशीन की कमी के कारण काफी मरीजों को दूसरे जिलों में रेफर करना पड़ता था। अब मशीन शुरू होने के बाद जिले के मरीजों को काफी लाभ होगा।

यह है डेंगू, मलेरिया व चिकनगुनिया का आंकड़ा
वर्ष
मलेरिया
डेंगू
चिकनगुनिया

2015
45
668
0

2016
17
157
15

2017
27
135
0

2018
17
98
0

2019
03
47
0

2020
00
28
1

2021
00
622
1

2022
00
535
1

2023
00
340
5

2024
00
00
00

स्वास्थ्यकर्मी आमजन को मौसमी बीमारियों को लेकर जागरूक करने में जुटे

विभाग के पास जितने भी स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध हैं। सभी फील्ड में लोगों को मौसमी बीमारियों को लेकर जागरूक करने में जुटे हैं। फिलहाल जिले में कोई डेंगू व मलेरिया का मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग में डेंगू व मलेरिया की जांच मुफ्त की जाती है। -डॉ. बिजेंद्र ढांडा, डिप्टी सीएमओ, मलेरिया।

०2जेएनडी06: मौसमी बीमारियों को लेकर जागरूक करते हुए स्वास्थ्यकर्मी।

०2जेएनडी06: मौसमी बीमारियों को लेकर जागरूक करते हुए स्वास्थ्यकर्मी।

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