जींद। नागरिक अस्पताल में कुछ ऐसी जरूरी दवाइयां हैं, जो खत्म हो चुकी हैं। बुखार के लिए दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवा ही नागरिक अस्पताल में नहीं है। इसके स्थान पर दूसरी दवाइयां देकर काम चलाया जा रहा है। यदि किसी व्यक्ति को कुत्ते ने काट लिया है और उसे ज्यादा जख्म हो गया हो तो उसके लिए लगाया जाने वाला इम्यूनोग्लोबिन इंजेक्शन भी नागरिक अस्पताल में नहीं है। ऐसे में मरीजों को दूसरी दवाइयां दी जाती हैं। कुछ लोग दवाइयां बाहर से खरीदने को मजबूर हैं।
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 1500-1600 लोगों की ओपीडी होती है। सोमवार को तो ओपीडी 1600 के पार भी चली जाती है। इतनी संख्या में मरीजों को प्रतिदिन दवाइयां देने से कई बार दवाइयां खत्म भी हो जाती हैं। नागरिक अस्पताल में दवाइयां स्वास्थ्य विभाग के कैथल में स्थित वेयर हाउस से आती हैं। कई बार दवाइयों का संकट ऐसा भी हो जाता है, जब वेयरहाउस में भी दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पाती। इसके लिए सिविल सर्जन को एक लाख रुपये की एक बार में दवाई अपने स्तर पर खरीदने का अधिकार भी है। अस्पताल प्रशासन जब वेयरहाउस में दवाइयां उपलब्ध नहीं हों तो लोकल स्तर पर दवाइयां खरीद लेता है। ऐसे में जब तक वेयरहाउस में दवाइयां नहीं होती तो शहर से ही दवाइयां खरीदी जाती हैं। इसके लिए सरकार ने मापदंड तय किए हुए हैं कि कौन सी दवाई किस रेट में खरीदनी है।
बॉक्स
ये दवाइयां उपलब्ध नहीं है अस्पताल में
दवा किस रोग में है कारगर
सेफैलेक्सिन बुखार के लिए दी जाने वाली एंटीबाइटिक
नोरफ्लोक्स यूरिन में इंफेक्शन के लिए
बीबी लोशन खुजली के लिए
क्लिंडामाइसिन पेट दर्द में इंफेक्शन के लिए
इम्यूनोग्लोबिन गर्दन से ऊपरी भाग में कुत्ते के काटने पर दिया जाने वाला इंजेक्शन
लीव-52 लीवर संबंधी समस्या को दूर करने के लिए
दूसरी दवाइयां देकर चलाया जा रहा काम
ऐसा नहीं है कि जो दवाइयां अस्पताल में खत्म हैं, उनको बाहर से लेने के लिए लोग मजबूर हैं। इन दवाइयों के स्थान पर दूसरी दवाइयां देकर काम चलाया जाता है, लेकिन इसमें एक समस्या है कि जो सही दवाई है, वह खत्म हो जाती है तो जो दूसरी दवाई दी जाती है, वह अन्य बीमारियों में भी काम करती है। दूसरी दवाई लेने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
मरीजों ने बयां की परेशानी
मुझे तीन दिन से बुखार था। चिकित्सक को दिखाया था। चिकित्सक ने दवाई लिख दी। जब दवाई खिड़की पर दवाई लेने के लिए गया तो उन्होंने कहा कि यह दवाई नहीं है, उसके स्थान पर दूसरी दवाई लेनी है तो बताओ, नहीं तो यह दवाई बाहर से खरीदनी पड़ेगी। मेरे पास पैसे नहीं थे तो मुझे दूसरी दवाई लेनी पड़ी।
--पवन कुमार, भिवानी रोड, जींद
मुझे खुजली की समस्या थी। चिकित्सक ने दवाई लिख दी थी लेकिन जो लोशन लिखा था, वह नहीं मिला। इसलिए यह दवाई बाहर से पैसे में खरीदनी पड़ी। लीवर के लिए लीव-52 मांगी थी, वह भी नहीं मिली, उसके स्थान पर दूसरी पीने की दवाई दी गई।
--कौशल्या देवी, राम कॉलोनी, जींद
नागरिक अस्पताल में इस समय हर प्रकार की दवाइयां उपलब्ध हैं। कई बार ऐसी स्थिति होती है कि दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पाती। फिलहाल फार्मासिस्ट कैथलवेयर हाउस से दवाइयां लेकर पहुंच गए हैं। जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्तर पर भी दवाइयां खरीद ली जाती हैं। फिलहाल वेयरहाउस में ही सभी प्रकार की दवाइयां उपलब्ध हैं, जो अस्पताल में दोपहर बाद पहुंच चुकी हैं। लीव-52 आयुष विभाग की दवा है, जो अस्पताल में नहीं आयुष विभाग में ही मिलती है।
-डॉ. मंजू कादियान, सिविल सर्जन।