05जेएनडी27 : एक निजी अस्पताल का रिकार्ड चेक करते डॉ. पालेराम कटारिया व उनकी टीम। संवाद
जींद। बच्चे के जन्म के साथ ही उसे 24 घंटे के अंदर कई तरह की जीवन रक्षक वैक्सीन लगाई जानी जरूरी होती हैं, लेकिन निजी अस्पताल इसका पालन नहीं कर रहे और बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। मंगलवार को जिला प्रतिरक्षण अधिकारी की टीम ने सात निजी अस्पताल का पड़ताल किया और यहां का रिकार्ड चेक किया। दो अस्पतालों में कुछ खामियां मिली, जिनको नोटिस दिया गया। भविष्य में ऐसा हुआ तो इन अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग प्रतिदिन के हिसाब से 500 रुपये जुर्माना लगाएगा।
सरकारी अस्पताल हो या फिर निजी अस्पताल उनमें जन्म लेने वाले बच्चों को 24 घंटे के दौरान काला पीलिया, खसरा, पोलियो जैसी बीमारियों से बचाव के लिए वैक्सीन लगाई जानी अनिवार्य होती है। यदि यह वैक्सीन इस समय के दौरान नहीं लगे तो बच्चे का इन बीमारियों की चपेट में आने का भय रहता है। स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिली कि कुछ निजी अस्पतालों में बच्चों को यह वैक्सीन नहीं लगाई जा रही हैं। शिकायतों के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को इन अस्पतालों की जांच की। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. पालेराम कटारिया ने अपनी टीम के साथ सात निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें टीकाकरण में कुछ कमियां मिलीं। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने अस्पताल संचालकों को निर्देश दिए कि उनके यहां जिन बच्चों का जन्म हो, उन्हें 24 घंटे के अंदर ही खसरा, काला पीलिया रोकने के टीके लगाए जाएं और पोलियो रोधी ड्रॉप्स जरूर पिलाएं। जो अस्पताल ऐसा नहीं करेगा, उस पर प्रतिदिन के हिसाब से 500 जुर्माना किया जाएगा। टीकाकरण में देरी सहन नहीं होगी। डॉ. पालेराम कटारिया ने कहा कि जिन अस्पतालों में बच्चों को समय पर टीके नहीं लगे, उन्हें नोटिस देकर उन पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चों के जन्म के 24 घंटे के अंदर उसी अस्पताल में बच्चों को कई बीमारियों से बचाने के टीके लगाना अनिवार्य है। इसमें देरी से बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ती है। वह बीमारियों का शिकार हो सकते हैं।
बच्चों को 24 घंटे के दौरान कई बीमारियों से संबंधित वैक्सीन लगाना जरूरी है। कुछ अस्पतालों में ऐसी वैक्सीन नहीं लगाने की शिकायतें मिल रही थी। इसलिए निरीक्षण किया गया है। कुछ कमियां निरीक्षण के दौरान मिली हैं। निजी अस्पतालों को नोटिस जारी किए जाएंगे। भविष्य में ऐसा मिला तो प्रतिदिन निजी अस्पताल पर 500 रुपये जुर्माना किया जाएगा। अभिभावकों को भी इसके प्रति ध्यान रखना चाहिए।
डॉ. गोपाल गोयल, सिविल सर्जन।