जींद। जिले में शनिवार शाम तथा रात को हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने भारी नुकसान किया है। बारिश के साथ तूफानी हवा तथा ओलावृष्टि से तैयार हो रही गेहूं की फसल को 50 प्रतिशत तथा सरसों की फसल को 70 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा सब्जी की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। सबसे ज्यादा नुकसान नरवाना तथा उचाना क्षेत्र में हुआ है। नरवाना में 100 एमएम तथा उचाना में 51 एमएम बारिश दर्ज की गई है। रात को हवा की गति 40 से 45 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रही। बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि से किसानों की मेहनत मिट्टी हो गई है। रविवार को अधिकतम तापमान 22 डिग्री, न्यूनतम तापमान 8 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम में आर्द्रता 36 प्रतिशत तथा हवा की गति 10 किलोमीटर प्रतिघंटा दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे मौसम शुष्क बना रहेगा। आकाश में आंशिक बादल छाए रहेंगे। कृषि विभाग ने बेमौसम बारिश तथा ओलावृष्टि से फसल खराबा का विवरण क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दर्ज करने के लिए कहा है।
बेमौसम बारिश, तूफानी हवा तथा ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान नरवाना तथा उचाना में हुआ है। जहां पर 90 प्रतिशत फसलों को नुकसान बताया जा रहा है। नरवाना में 100 एमएम बारिश दर्ज हुई है, जबकि उचाना में 51 एमएम बारिश हुई है। अलेवा में 40 एमएम, पिल्लूखेड़ा में 34 एमएम, सफीदों में 15 एमएम, जींद में 7.2 एमएम बारिश हुई, जबकि जुलाना में एक एमएम बारिश दर्ज की गई है। जुलाना को छोड़कर नरवाना, उचाना, जींद, पिल्लूखेड़ा, सफीदों तथा अलेवा में बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है। ओलावृष्टि कहीं कम तो कहीं ज्यादा हुई है। नरवाना तथा उचाना में तो कुछ स्थानों पर रविवार को मौसम साफ रहने तथा धूप खिली रहने के बाद भी पानी खेतों में भरा रहा। किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल को 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान है। गेहूं की फसल में बालियां लग चुकी हैं। जिन बालियों पर ओले लग हैं, वह खराब हो गई हैं। कुछ स्थान पर अभी गेहूं में बालियां नहीं आई हैं, इससे उनको कम नुकसान हुआ है। इसके अलावा सरसों की फसल को 70 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है। सरसों की फसल कटने के लिए तैयार थी। फलियां झड़ने से काफी नुकसान हुआ है।
एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा गेहूं की फसल खराब
जिले में 2.15 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल की खेती की गई है। इसमें से एक लाख हेक्टेयर की फसल तो पूरी तरह खराब होने के कगार पर पहुंच गई है। नरवाना तथा उचाना में सबसे ज्यादा फसल खराब हुई है। जींद, अलेवा में उचाना व नरवाना के मुकाबले कम नुकसान है। केवल जुलाना ही ऐसा क्षेत्र है, जिसमें गेहूं की फसल को नाममात्र नुकसान है।
सरसों को 10 हजार हेक्टेयर में से 8 हजार पर संकट
जिले में 10 हजार हेक्टेयर में सरसों की खेती की गई है। सरसों का अधिकतर क्षेत्र नरवाना व उचाना में ही है। ऐसे में अकेले नरवाना व उचाना में आठ हजार हेक्टेयर सरसों की फसल बीजी गई है। नरवाना और उचाना में ही अधिक ओलावृष्टि हुई है। इस कारण जिले में लगभग आठ हजार हेक्टेयर में सरसों की फसल पूरी तरह से बर्बादी के कगार पर है।
सब्जी की फसल पूरी तरह से खराब
जींद जिले में अहीरका, अमरहेड़ी, ईक्क्स, ढाणी समेत आसपास के गांवों में सब्जी की खेती की जाती है। बारिश व ओलावृष्टि के कारण गाजर को छोड़कर सभी सब्जियां पूरी तरह से खराब हो गई हैं। खेत में जहां पर ओला गिरता है, वहां पर वह पिघल कर जहर के समान हो जाता है। ऐसे में सब्जियां की फसलें तो पूरी तरह से खराब हो गई हैं।
आगे मौसम शुष्क बना रहेगा। तापमान में भी ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होग। रात का तापमान कम रहेगा। इस दौरान आंशिक बादल देखे जा सकते हैं। फिलहाल बारिश की संभावना नहीं है। -डॉ. राजेश कुमार, मौसम विज्ञानी, कृषि विज्ञान केंद्र, पांडु पिंडारा।