जींद। स्वास्थ्य विभाग टीबी मुक्त भारत बनाने को लेकर अब ग्राम पंचायतों से संपर्क करेगा। उनके बीच सहमति बनने पर मरीजों के स्वास्थ्य का ख्याल रखा जाएगा।
ग्राम पंचायतें टीबी के मरीजों को पौष्टिक आहार देने के लिए जिम्मेदारी उठाएंगी। जिले में 300 ग्राम पंचायत हैं और टीबी के 1945 मरीज हैं। निक्षय योजना के तहत सभी टीबी मरीजों को दवाइयों के साथ पोषण के लिए 500-500 रुपये की राशि दी जाती है। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत उपचाराधीन टीबी रोगियों को निक्षय मित्रों से पोषण सहायता भी जाती है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य रखा हुआ है।
इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग ने अब ग्राम पंचायतों से संपर्क साधने का निर्णय लिया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने सिविल सर्जन व क्षय रोग के नोडल अधिकारियों को पत्र लिखकर पंचायतों से संपर्क साधने के निर्देश दिए हैं। टीबी मरीजों के लिए रोजाना खानपान में पौष्टिक आहार लेना जरूरी है। मरीजों को पौष्टिक आहार लेने के लिए अस्पताल में जाना पड़ता है। इसे देखते हुए मुख्यालय ने स्वास्थ्य विभाग को पंचायतों से संपर्क साधने के निर्देश दिए हैं। इससे मरीजों को अस्पताल तक आने-जाने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी और उन्हें घर पर ही पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाया जा सकेगा।
मुख्यालय से मिले निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। खंड स्तर पर स्वास्थ्य अधिकारी जल्द ही सरपंचों के साथ बैठक करेंगे। सहमति जताने वाले ग्राम पंचायतों को उनके क्षेत्र के टीबी मरीजों का ब्योरा देने के बाद पौष्टिक आहार वितरण करने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
ग्राम पंचायतों के माध्यम में टीबी के मरीजों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए पहले पंचायतों से संपर्क साधा जाएगा। टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार देने व उनको गोद लेने के लिए जन प्रतिनिधि भी आगे आएं।
डॉ. पालेराम कटारिया, उप सिविल सर्जन जींद