फोटो 23जेएनडी29-भारतेंदु शांडिल्य।
उचाना। गणेश चतुर्थी का पर्व देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। भक्त घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश को भावपूर्ण विदाई दी जाती है जिसे गणेश विसर्जन कहा जाता है। राधा-कृष्ण प्राचीन मंदिर पुजारी भारतेंदु शांडिल्य ने बताया कि जिस प्रकार गणपति स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है, उसी प्रकार गणेश विसर्जन के लिए भी शुभ समय का ध्यान रखना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 25 सितंबर को रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को मनाई जाएगी। शांडिल्य ने कहा कि अनंत चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। इसके बाद श्रद्धा के साथ गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से विसर्जन के दौरान धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ जल स्रोतों की स्वच्छता का भी ध्यान रखने की अपील की। संवाद